नालंदा में इन 11 पैक्सों पर लटकी कार्रवाई की तलवार, जानें पूरा मामला

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में खरीफ विपणन मौसम 2024-25 के तहत धान खरीद और कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) जमा कराने की प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिले में कुल 1 लाख 75 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद की गई थी, जिसके बदले 1 लाख 20 हजार 139.80 मीट्रिक टन सीएमआर जमा कराया जाना था। लेकिन अंतिम तिथि 10 अगस्त 2025 तक 11 पैक्सों ने लगभग 1700 मीट्रिक टन सीएमआर जमा नहीं किया। अब जिला सहकारिता विभाग ने इन पैक्सों पर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और जल्द ही नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सबसे अधिक बकाया चावल वाले पैक्सों में बेन प्रखंड का एकसारा पैक्स (498.68 एमटी), इस्लामपुर प्रखंड का पंचलोवा पैक्स (479.67 एमटी), सिलाव प्रखंड का नीरपुर पैक्स (195.44 एमटी), और गिरियक प्रखंड का पोखरपुर पैक्स (147.44 एमटी) शामिल हैं।
इसके अलावा अन्य पैक्सों में सकरी पैक्स: 139.03 एमटी, धुरगांव पैक्स: 79.80 एमटी, दनियावां पैदापुर पैक्स: 58.56 एमटी, करायपरसुराय पैक्स: 43.51 एमटी, केशोपुर पैक्स: 29.37 एमटी, सूढी पैक्स: 26.77 एमटी, बरनौसा पैक्स: 1.55 एमटी बकाया है।
जिला सहकारिता विभाग ने सभी पैक्सों को सीएमआर जमा करने के लिए कई बार समय विस्तार दिया। इसके बावजूद इन 11 पैक्सों के अध्यक्षों ने अंतिम तिथि तक शत-प्रतिशत चावल जमा नहीं किया।
विभाग और जिला प्रशासन ने समय-समय पर बैठकों के माध्यम से पैक्स अध्यक्षों को निर्देश जारी किए, लेकिन धान खरीद में दिखाई गई तत्परता सीएमआर जमा करने में नदारद रही।
जिला सहकारिता पदाधिकारी धर्मनाथ प्रसाद ने बताया कि बकायेदार पैक्सों के खिलाफ विधि-सम्मत कार्रवाई शुरू की जा रही है। सभी 11 पैक्सों को नोटिस जारी किए गए हैं, और जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पैक्स अध्यक्षों की ओर से धान खरीद में तत्परता दिखाई जाती है, लेकिन सीएमआर जमा करने में उनकी लापरवाही चिंताजनक है। अब विभाग इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा।
बहरहाल, यह मामला नालंदा जिले के सहकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। विभाग ने स्पष्ट किया कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही को रोकने के लिए और सख्त कदम उठाए जाएंगे। स्थानीय किसानों और सहकारी समितियों से जुड़े लोगों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है और मांग की है कि बकायेदार पैक्सों पर जल्द से जल्द कार्रवाई हो ताकि व्यवस्था में सुधार आए।





