बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में किसानों के लिए शुरू की गई यूनिक आईडी (Unique ID) योजना, जो आधार कार्ड की तर्ज पर बनाई गई है, वह अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही है। 7 अप्रैल 2025 को शुरू हुए इस विशेष अभियान के तीन महीने बीत जाने के बाद भी केवल 16,378 किसानों का ही फॉर्म रजिस्ट्री हो पाया है। जबकि जिले में कुल 2,79,780 किसानों को इस योजना के तहत यूनिक आईडी प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई थी। पहले चरण में प्रत्येक प्रखंड के दो-दो गांवों का चयन कर कुल 40 गांवों में इसे लागू किया गया। दूसरे चरण में इसे 173 गांवों तक विस्तारित किया गया और अंत में जिले के 696 राजस्व गांवों के रैयत किसानों को इस योजना में शामिल किया गया।
हालांकि योजना की प्रगति बेहद धीमी रही है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार कृषि समन्वयकों ने अब तक 35,141 किसानों का निबंधन करके उनके आवेदन हल्का कर्मचारियों के पास भेजे हैं। लेकिन इनमें से केवल 16,378 किसानों का ही फॉर्म रजिस्ट्री हो पाया है। शेष 18,378 आवेदन अभी भी लंबित हैं।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 696 चयनित गांवों में से केवल 549 गांवों में ही प्रक्रिया शुरू हो पाई है। 147 राजस्व गांवों के किसान अभी भी इस योजना के लाभ से वंचित हैं।
इस योजना की धीमी गति के पीछे कई कारण सामने आए हैं। मुख्य रूप से हल्का कर्मचारियों की ओर से ई-केवाईसी सत्यापन और यूनिक आईडी निर्माण में कम रुचि लेना इसका प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
इसके अलावा जून 2025 में हल्का कर्मचारियों की हड़ताल ने भी इस प्रक्रिया को और प्रभावित किया। योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी कृषि विभाग और अंचल कार्यालय को सौंपी गई है।
पहले चरण में कृषि समन्वयक गांवों में कैंप लगाकर किसानों का सत्यापन, निबंधन और ई-केवाईसी करते हैं। जबकि दूसरे चरण में हल्का कर्मचारी रैयत किसानों की जमीन का सत्यापन और ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करके यूनिक आईडी जेनरेट करते हैं। यहीं पर प्रक्रिया में देरी हो रही है।
यूनिक आईडी योजना से किसानों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है। इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसानों को बार-बार ई-केवाईसी कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
आधार कार्ड की तरह यूनिक आईडी में किसान की सभी महत्वपूर्ण जानकारी, जैसे नाम, पिता का नाम, स्वामित्व वाली जमीन का खाता, खेसरा नंबर, मोबाइल नंबर और आधार नंबर, एक संपूर्ण डाटाबेस के रूप में दर्ज रहेगी।
इसके अतिरिक्त यूनिक आईडी धारक किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा। सस्ते ऋण, कृषि इनपुट, विशिष्ट सलाह और उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में भी सुविधा होगी। साथ ही सूचीबद्ध किसानों को एग्रीस्टेक परियोजना से जोड़ा जाएगा, जो उनकी आय और उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होगी।
यूनिक आईडी बनवाने के लिए किसानों को आधार कार्ड, आधार से लिंक मोबाइल नंबर और जमीन की अद्यतन रसीद शिविर में जमा करनी होगी। इसके आधार पर एक संपूर्ण डाटाबेस तैयार किया जाएगा। जिसमें किसान की सभी आवश्यक जानकारी शामिल होगी। यह डाटाबेस एक क्लिक में सारी जानकारी उपलब्ध कराएगा, जिससे योजनाओं का लाभ लेना आसान हो जाएगा।
इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी नीतेश कुमार का कहना है कि यूनिक आईडी के माध्यम से किसानों को उनकी सारी जानकारी एक क्लिक में उपलब्ध होगी। इससे सरकार की योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा होगी। अंचल कार्यालयों के साथ समन्वय बनाकर प्रक्रिया को गति देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
