Unique Love Story: नाती-पोते वाले प्रेमी संग जाने पर अड़ी महिला, कोर्ट ने क्या कहा?
कतरीसराय थाना क्षेत्र का मामला; मायके से प्रेमी संग चली गई थी महिला, पुलिस ने बरामद कर कोर्ट में कराया बयान, बालिग होने के कारण अदालत ने प्रेमी के साथ रहने की दी अनुमति।

कतरीसराय (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के कतरीसराय थाना क्षेत्र से सामने आया एक दिलचस्प और सामाजिक रूप से जटिल मामला (Unique Love Story) इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। दरवेशपुरा गांव की रहने वाली दो बच्चों की मां अपने मायके से एक ऐसे व्यक्ति के साथ चली गई, जो खुद नाती-पोते वाला बताया जाता है।
मामले की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जांच करते हुए महिला को बरामद कर लिया, लेकिन घटनाक्रम ने तब नया मोड़ ले लिया जब अदालत में महिला ने साफ तौर पर अपने प्रेमी के साथ रहने की इच्छा जता दी।
कतरीसराय थानाध्यक्ष धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि महिला के मायके वालों की ओर से थाना में लिखित आवेदन देकर उसके गायब होने की सूचना दी गई थी। आवेदन के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और अनुसंधान पदाधिकारी संजय दास के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए महिला को बरामद कर लिया।
बरामदगी के बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए महिला को न्यायालय में प्रस्तुत किया। वहां उसका बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज कराया गया। बयान के दौरान महिला ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह अपनी मर्जी से अपने प्रेमी के साथ रहना चाहती है।
अदालत ने महिला की स्वतंत्रता को माना सर्वोपरिः न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान यह पाया कि महिला बालिग है और अपने जीवन से जुड़े फैसले स्वयं लेने में सक्षम है। इसी आधार पर अदालत ने उसके बयान को महत्व देते हुए उसे उसकी इच्छा के अनुसार जीवनयापन करने की अनुमति दे दी।
अदालत के आदेश के बाद महिला को उसके प्रेमी महेश्वरी पासवान (पिता रामजी पासवान), निवासी ग्राम सोनवर्षा, थाना साम्मो, जिला बेगूसराय के सुपुर्द कर दिया गया।
दिलचस्प स्थिति, प्रेमी की पहली पत्नी भी रही मौजूदः इस पूरे घटनाक्रम के दौरान एक और रोचक स्थिति देखने को मिली। पुलिस सूत्रों के अनुसार जब महिला को न्यायालय में पेश किया गया, तब महेश्वरी पासवान की पहली पत्नी भी मौके पर मौजूद थीं। इससे यह मामला और अधिक सामाजिक चर्चा का विषय बन गया।
परिजनों ने दी समझाइश, लेकिन नहीं बदला निर्णयः थानाध्यक्ष के अनुसार महिला के मायके पक्ष ने उसे काफी समझाने की कोशिश की। परिजनों ने यह भी बताया कि जिस व्यक्ति के साथ वह जाना चाहती है, वह उम्रदराज है और उसके नाती-पोते तक हैं। इसके बावजूद महिला अपने निर्णय पर अड़ी रही और प्रेमी के साथ जाने की जिद करती रही।
अंततः न्यायालय ने महिला की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानूनी अधिकार को देखते हुए उसके निर्णय को मान्यता दे दी।
सामाजिक बहस का विषय बना मामलाः ग्रामीण इलाके में सामने आए इस मामले ने सामाजिक रिश्तों, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारिवारिक मूल्यों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां परिजन इसे परिवार की प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं कानून की नजर में बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद से जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है।
इसी कारण अदालतों में ऐसे मामलों में प्रायः व्यक्ति की स्वतंत्र इच्छा को प्राथमिकता दी जाती है, चाहे सामाजिक परिस्थितियां कितनी भी जटिल क्यों न हों। समाचार स्रोतः नालंदा दर्पण डेस्क/संतोष भारती









