Home धर्म-कर्म ज्ञानपीठ नालंदा में वियतनामी थिक-मिन्ह-चाऊ ऑडिटोरियम बनना शुरु

ज्ञानपीठ नालंदा में वियतनामी थिक-मिन्ह-चाऊ ऑडिटोरियम बनना शुरु

Vietnamese Thich Minh Chau Auditorium to be built at Jnanpith Nalanda

राजगीर (नालंदा दर्पण)। नालंदा की पावन धरती पर एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। करीब 20 करोड़ की लागत से ज्ञानपीठ नालंदा में बनने वाले ‘थिक-मिन्ह-चाऊ ऑडिटोरियम’ का भूमि पूजन सह शिलान्यास समारोह संपन्न हुआ। यह ऑडिटोरियम वियतनाम इंस्टिट्यूट ऑफ बौद्धिस्ट स्टडीज और नव नालंदा महाविहार सम विश्वविद्यालय के बीच हुए समझौते के तहत निर्मित होगा। इस अवसर पर दोनों संस्थाओं ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जो भारत और वियतनाम के बीच शैक्षिक और सांस्कृतिक सहयोग को और गहरा करने का प्रतीक है।

नव नालंदा महाविहार परिसर में 600 दर्शकों की बैठने की क्षमता वाला यह ऑडिटोरियम न केवल एक भवन होगा, बल्कि ज्ञान, ध्यान और संस्कृति का एक जीवंत केंद्र भी बनेगा। शिलान्यास समारोह में वियतनाम के पूज्य बौद्ध भिक्षु थिक-नात-तु ने कहा कि यह ऑडिटोरियम शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान साबित होगा। नालंदा की प्राचीन शिक्षा परंपरा और बौद्ध धर्म की शिक्षाएं आज भी विश्व में प्रेरणा का स्रोत हैं। यह स्थल युवाओं के लिए ज्ञान और करुणा का आदर्श केंद्र बनेगा।

उन्होंने छात्रों और शिक्षकों को अपने ज्ञान का उपयोग मानवता के कल्याण के लिए करने की प्रेरणा दी। भिक्षु ने इस संरचना को एक जीवंत स्मारक करार देते हुए कहा कि यह आने वाली पीढ़ियों को विनम्रता के साथ ज्ञान की खोज और करुणा के संवर्धन के लिए प्रेरित करेगा।

नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने इस अवसर को केवल एक निर्माण कार्य की शुरुआत नहीं, बल्कि भारत और वियतनाम के सांस्कृतिक, शैक्षणिक और कूटनीतिक संबंधों को नई दिशा देने वाला क्षण बताया।

उन्होंने कहा कि यह ऑडिटोरियम भविष्य में नैतिकता, ध्यान, करुणा, पर्यावरण और मानव कल्याण जैसे विषयों पर अंतरराष्ट्रीय संवाद का केंद्र बनेगा। प्रो. सिंह ने थिक मिन्ह चाऊ को वियतनाम के ह्वेनसांग की उपाधि दी, जिन्होंने भारत से प्राप्त पालि ग्रंथों का वियतनामी भाषा में अनुवाद कर बौद्ध ज्ञान को सुरक्षित किया। उन्होंने इसे दोनों देशों के आध्यात्मिक संबंधों को गहराने वाला योगदान बताया।

धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष रणवीर नंदन ने इस ऑडिटोरियम को भारत और वियतनाम के बीच शैक्षिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्राचीन नालंदा ज्ञान और बुद्धिमत्ता का केंद्र रहा है। इस आधुनिक ऑडिटोरियम के माध्यम से यह परंपरा पुनर्जीवित होगी।

उन्होंने इसे युवा पीढ़ी के लिए अध्ययन, संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच करार दिया। रणवीर नंदन ने सभी शिक्षकों, छात्रों और अधिकारियों को इस पहल को सफल बनाने के लिए शुभकामनाएं दीं और दोनों देशों के सहयोग को और आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई।

इस ऐतिहासिक समारोह में वियतनाम के 140 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने भाग लिया। अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. श्रीकांत सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि रजिस्ट्रार प्रो. रूबी कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। यह आयोजन नालंदा की वैश्विक पहचान को और सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बता दें कि नालंदा विश्वविद्यालय प्राचीन काल से ही ज्ञान और शिक्षा का वैश्विक केंद्र रहा है। इस ऑडिटोरियम के निर्माण से नालंदा की यह गौरवशाली परंपरा न केवल पुनर्जनन पाएगी, बल्कि आधुनिक तकनीक और वैश्विक सहयोग के साथ नई ऊंचाइयों को भी छूएगी।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version