Home धर्म-कर्म सर्दी की ठिठुरन के साथ ही मिनी काशी बना राजगीर ब्रह्मकुंड

सर्दी की ठिठुरन के साथ ही मिनी काशी बना राजगीर ब्रह्मकुंड

With the chill of winter, Rajgir Brahmakund becomes Mini Kashi.

राजगीर (नालंदा दर्पण संवाददाता)। जैसे ही नवंबर की हवाएं ठंडी होने लगती हैं, राजगीर की वादियां एक रहस्यमयी पुकार छोड़ती हैं- “आओ, ब्रह्मा का कुंड तुम्हारा इंतजार कर रहा है।” सुबह चार बजे का अंधेरा पूरी तरह छंटा भी नहीं होता कि पंडुकशिला की पहाड़ियों से निकलती भाप की लहरें और हर हर महादेव के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठता है। सर्दी का मौसम आते ही राजगीर के विश्वप्रसिद्ध 22 गर्मजल कुंड और 52 धाराएं फिर से जिंदगी की रफ्तार पकड़ लेती हैं।

स्थानीय पौराणिक कथाओं के अनुसार सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने इसी स्थान पर यज्ञ किया था। यज्ञ की अग्नि इतनी प्रचंड थी कि पृथ्वी के भीतर का जल उबाल खाने लगा और सात स्थानों पर गरम झरने फूट निकले। इन्हीं में सबसे पवित्र माना जाता है ब्रह्मकुंड।

मान्यता है कि यहां स्नान करने से सात जन्मों के पाप धुल जाते हैं और ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी क्षय हो जाते हैं। यही कारण है कि दूर-दूर से श्रद्धालु कड़ाके की ठंड में भी नंगे पांव, कंधे पर गमछा डाले, लाइन में लगकर ब्रह्मकुंड में डुबकी लगाते दिखते हैं।

इसी के बगल में है मक्खदुम कुंड, जिसे मुस्लिम संत हजरत मक्खदुम शाह की तपोस्थली माना जाता है। कहते हैं कि संत यहां 12 साल तक तपस्या करते रहे और उनके तप के प्रभाव से जल में चमत्कारी शक्ति आ गई। हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग यहां स्नान करते हैं और मन्नत मांगते हैं।

वैज्ञानिक मान्यता है कि राजगीर के सात प्रमुख झरनों सप्तधारा में सल्फर, सोडियम, पोटैशियम और रेडियम के सूक्ष्म कण मिले हैं। जापान के प्रसिद्ध कुशात्सु ओंसेन और तुर्की के पामुकले जैसे विश्व के चुनिंदा गर्म झरनों में राजगीर का नाम शुमार है। डॉक्टरों का कहना है कि यहां का पानी अनेकों गंभीर बीमारियों की रामबाण दवा है।

अन्य प्रमुख कुंडों में छुपी अनंत ऋषि कुंड- जहां ऋषि अनंत ने हजारों वर्ष तपस्या की थी। कश्यप ऋषि कुंड- कश्यप ऋषि ने यहां जल समाधि ली थी। सूर्य कुंड- मान्यता है सूर्यदेव यहां स्वयं स्नान करते हैं, इसलिए पानी हमेशा सबसे गर्म रहता है। लक्ष्मी नारायण कुंड- नवविवाहित जोड़े यहां स्नान कर वैवाहिक सुख की मन्नत मांगते हैं। गंगा-यमुना कुंड- दोनों कुंड एक ही चट्टान से निकलते हैं, मानो गंगा-यमुना का संगम की तस्वीर।

सर्दी में राजगीर क्यों बन जाता है ‘मिनी काशी’?

सुबह 4 बजे से रात 11 बजे तक कुंडों के बाहर लंबी-लंबी कतारें। एक व्यक्ति बाहर निकलता है तो दो अंदर घुसते हैं। चाय-पकोड़े की दुकानों से उठती खुशबू, भजन-कीर्तन की स्वर लहरियां और पहाड़ों पर चढ़ते सूरज की लालिमा। पूरा दृश्य किसी स्वप्नलोक सा लगता है। प्रशासन ने इस बार विशेष इंतजाम किए हैं। अलग-अलग लाइन महिलाओं और पुरुषों के लिए सीसीटीवी निगरानी, लाइफगार्ड, चेंजिंग रूम और रात में एलईडी लाइटें।

अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय प्रचार सचिव सुधीर कुमार उपाध्याय कहते हैं कि यहां का पानी केवल शरीर नहीं, आत्मा को भी शुद्ध करता है। ब्रह्मा जी का यज्ञ आज भी जीवित है, बस अब वह अग्नि के रूप में नहीं, गर्म जल के रूप में बह रही है।

जैसे-जैसे दिसंबर नजदीक आ रहा है, राजगीर के होटल फुल होने लगे हैं। टैक्सियां, ई-रिक्शा और घोड़ागाड़ियां रात-दिन दौड़ रही हैं। स्थानीय व्यापारी मुस्कुराते हैं, “सर्दी आते ही हमारा व्यापार भी गरम हो जाता है!”

तो इस सर्दी अगर आप भी ठंड से परेशान हैं, शरीर में दर्द है या बस कुछ दिन सुकून की तलाश है तो राजगीर के ब्रह्मकुंड आपकी पुकार सुन रहे हैं। बस एक गमछा और थोड़ा सा श्रद्धा लेकर चलिए… बाकी सब ब्रह्मा जी संभाल लेंगे

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