बिहार विधानसभा में उठा नालंदा जिला सहकारिता पदाधिकारी की गलत अनुशंसा

नालंदा जिला सहकारिता पदाधिकारी की यह लापरवाही किसानों को उनके अधिकारों से वंचित कर रही है और उनके रोज़गार से जुड़ी सरकारी योजनाओं को अंजाम नहीं मिल पा रहा है

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के 29 पंचायतों में पैक्स चुनाव न कराए जाने का मुद्दा बिहार विधानसभा में गरमाया। अस्थावां जदयू विधायक डॉ. जितेंद्र कुमार ने बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री से सवाल करते हुए कहा कि राज्य निर्वाचन प्राधिकरण ने केवल सात पैक्सों के मतदाता सूची के प्रकाशन पर रोक लगाई थी। लेकिन जिला सहकारिता पदाधिकारी की गलत अनुशंसा के कारण 22 पंचायतों के पैक्स चुनाव पर भी रोक लगा दी गई।

विधायक ने विधानसभा को बताया कि इस गलत अनुशंसा के कारण लगभग दो हजार किसान सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। इसके साथ ही धान की खरीद प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है, जो सरकार के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है।

विधायक ने आरोप लगाया कि जिला सहकारिता पदाधिकारी की यह लापरवाही किसानों को उनके अधिकारों से वंचित कर रही है और उनके रोज़गार से जुड़ी सरकारी योजनाओं को अंजाम नहीं मिल पा रहा है।

विधायक ने कहा कि इन सवालों के बाद प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है और उम्मीद जताई कि जल्द ही बाकी 29 पंचायतों में पैक्स चुनाव कराए जाएंगे। इसके लिए तिथि निर्धारित की जाएगी। किसानों में इस निर्णय को लेकर गहरी नाराजगी है और उनका कहना है कि वे अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं।

किसानों का यह भी कहना है कि अगर चुनाव नहीं कराए गए तो वे और भी संघर्ष करेंगे। यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी संवेदनशील हो गया है। क्योंकि इससे किसान वर्ग में सरकार के खिलाफ गहरी नाराजगी बढ़ रही है।

अब यह देखना होगा कि सरकार और प्रशासन जल्द से जल्द इस मुद्दे का समाधान करते हैं या नहीं। ताकि किसानों को उनका हक मिल सके।

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