कन्या आवासीय उच्च विद्यालय में कीड़ा युक्त भोजन से 15 छात्राएं बीमार

राजगीर (नालंदा दर्पण)। नालंदा थाना क्षेत्र के सब्बैत रघुबिगहा में स्थित राजकीय अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या प्लस टू आवासीय उच्च विद्यालय में एक हृदयविदारक घटना ने स्थानीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया। स्कूल में परोसे गए कीड़ा युक्त भोजन खाने के बाद 15 छात्राएँ गंभीर रूप से बीमार हो गईं। इनमें से एक छात्रा आंचल कुमारी की हालत नाजुक बनी हुई है। सभी प्रभावित छात्राओं को तत्काल पावापुरी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।
घटना उस समय की है, जब स्कूल में दोपहर का भोजन परोसा गया। छात्राओं के अनुसार, भोजन में कीड़े और खराब गुणवत्ता वाली सामग्री थी, जिसे खाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।
सबसे पहले आंचल कुमारी को चक्कर आने लगे और वह बेहोश हो गई। इसके बाद अन्य 12 छात्राओं ने भी उल्टी, चक्कर और कमजोरी की शिकायत की। दो अन्य छात्राएँ बाद में बीमार पड़ गईं, जिसके बाद स्थिति और गंभीर हो गई।
छात्राओं ने बताया कि पिछले तीन-चार दिनों से जीविका दीदी द्वारा बनाया गया भोजन लगातार खराब गुणवत्ता का था। एक पीड़ित छात्रा ने दुखी स्वर में कहा कि हमने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हमें डाँट-फटकार कर चुप करा दिया जाता था।
छात्राओं का यह भी आरोप है कि आवासीय व्यवस्था के कारण वे अपने परिवार से भी खुलकर शिकायत नहीं कर पातीं, क्योंकि स्कूल प्रशासन उनकी बात को दबा देता है।
घटना की सूचना मिलते ही राजगीर के एसडीओ आशीष नारायण, डीएसपी सुनील कुमार और जिला कल्याण पदाधिकारी तुरंत पावापुरी मेडिकल कॉलेज पहुँचे। उन्होंने डॉक्टरों से छात्राओं के इलाज की प्रगति के बारे में जानकारी ली और स्कूल प्रशासन से पूरे मामले की जाँच शुरू करने का आश्वासन दिया।
एसडीओ ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर मामला है। हम भोजन की गुणवत्ता और स्कूल की व्यवस्था की जाँच करेंगे। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
छात्राओं की बिगड़ती हालत की सूचना एक ग्रामीण ने 112 आपातकालीन नंबर पर दी। इसके बाद पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और एम्बुलेंस की व्यवस्था कर सभी बीमार छात्राओं को पावापुरी मेडिकल कॉलेज पहुँचाया। पुलिस ने स्कूल प्रशासन और भोजन आपूर्तिकर्ताओं से पूछताछ शुरू कर दी है।
डीएसपी सुनील कुमार ने बताया कि हम इस मामले की गहन जाँच कर रहे हैं। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
इस घटना ने स्थानीय समुदाय में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। कई अभिभावकों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की माँग की।
एक अभिभावक रामप्रसाद सिंह ने कहा कि हम अपनी बेटियों को शिक्षा के लिए स्कूल भेजते हैं, न कि उनकी जान जोखिम में डालने के लिए। यह शर्मनाक है कि सरकारी स्कूल में ऐसी लापरवाही हो रही है।
यह घटना सरकारी स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ तब होती हैं, जब भोजन आपूर्ति और रसोई प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी होती है।
नालंदा जिले के एक सामाजिक कार्यकर्ता अनिल कुमार ने कहा कि यह पहली बार नहीं है कि इस तरह की घटना सामने आई है। सरकार को स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता के लिए सख्त निगरानी तंत्र स्थापित करना होगा।
बहरहाल, इस घटना ने न केवल स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन पर भी ध्यान केंद्रित किया है। क्या यह घटना एक चेतावनी है कि हमें अपने बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के लिए और अधिक सतर्क होने की आवश्यकता है? क्या प्रशासन इस मामले में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करेगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों?





