ACS सिद्धार्थ साहब, जरा नालंदा के ऐसे स्कूलों की सुध लीजिए !

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का हक है, लेकिन खनपुरा के इस विद्यालय की स्थिति इस अधिकार का उल्लंघन करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति सुधारने के लिए सरकार को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है...

हिलसा (नालंदा दर्पण)। करायपरसुराय प्रखंड के खनपुरा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बच्चों के भविष्य पर भारी पड़ रहा है। इस विद्यालय में केवल एक कमरे की उपलब्धता के कारण पहली से पांचवीं कक्षा तक के 102 छात्र, छात्राओं को पढ़ाई के लिए उचित स्थान नहीं मिल पा रहा है। शिक्षा का मंदिर कहलाने वाला यह विद्यालय अपनी बदहाल स्थिति के कारण चर्चा में है, जहां बच्चे क्लासरूम के बजाय पेड़ की छांव में जमीन पर बोरे और प्लास्टिक की चटाइयों पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।

ACS Siddharth Sir, please take care of such schools!
ACS Siddharth Sir, please take care of such schools!

प्राथमिक शिक्षा को बच्चों के भविष्य की नींव माना जाता है, लेकिन खनपुरा के इस विद्यालय की स्थिति इस नींव को कमजोर कर रही है। विद्यालय में केवल एक कमरा उपलब्ध है, जिसमें सभी कक्षाओं को समायोजित करना असंभव है। नतीजतन शिक्षकों को मजबूरन बच्चों को बाहर खुले आसमान के नीचे पढ़ाना पड़ता है। गर्मी, बारिश और ठंड के मौसम में बच्चों को पढ़ाई में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि बारिश के दिनों में पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाती है, क्योंकि बाहर पढ़ाने की कोई व्यवस्था नहीं है।

विद्यालय में चार शिक्षक नियुक्त हैं, जो 102 छात्र-छात्राओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। लेकिन कमरों की कमी के कारण शिक्षकों को एक साथ कई कक्षाओं को संभालना पड़ता है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे चाहकर भी बच्चों को बेहतर तरीके से नहीं पढ़ा पाते। एक कमरे में सभी कक्षाओं को पढ़ाना संभव नहीं है, और बाहर पढ़ाने में कई तरह की समस्याएं आती हैं।

ACS सिद्धार्थ साहब, जरा ऐसे स्कूलों की सुध लीजिए !
ACS सिद्धार्थ साहब, जरा ऐसे स्कूलों की सुध लीजिए !

ग्रामीणों और अभिभावकों में इस स्थिति को लेकर गहरी नाराजगी है। स्थानीय निवासी रामविलास यादव ने कहा कि उनके बच्चों का भविष्य दांव पर है। सरकार स्कूलों में मुफ्त शिक्षा की बात तो करती है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं करा पा रही। एक अन्य अभिभावक सुनीता देवी ने बताया कि उनके बच्चे बारिश के मौसम में स्कूल नहीं जा पाते, क्योंकि बाहर पढ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं है।

बहरहाल, इस विद्यालय की स्थिति सरकारी उदासीनता को उजागर करती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बजट की कमी और अन्य प्रशासनिक कारणों से नई कक्षाओं का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हो सका है।

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Nalanda Darpan

नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के संचालक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके। More »

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