पर्यावरण
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राजगीरः पौराणिक मोक्षदायिनी सरस्वती नदी को नाला बना डाला!
राजगीर (नालंदा दर्पण)। प्राचीन धार्मिक नगरी राजगीर एक बार फिर अपने ऐतिहासिक मलमास मेला के कारण चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह श्रद्धा नहीं, बल्कि उस आस्था के क्षरण की चिंता है जो सदियों से यहां की पहचान रही है। इस आस्था के केंद्र में रही सरस्वती नदी आज खुद…
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मुहाने, पैमार, सकरी और पंचाने नदियों पर अतिक्रमण किसानों के लिए बनी मुसीबत
नालंदा दर्पण डेस्क। नालंदा जिले में पंचाने, पैमार, सकरी और मुहाने जैसी सुरसर नदियां कभी इस क्षेत्र के गांवों और किसानों के लिए जीवन रेखा मानी जाती थी। इन्हीं नदियों के जल से खेतों की सिंचाई होती थी। पशुपालन को संबल मिलता था। ग्रामीण जीवन की अर्थव्यवस्था चलती थी। लेकिन आज…
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प्रखंड-अंचल परिसर में किसकी अनुमति से काटकर ढोए गए हरे पेड़?
बेन (नालंदा दर्पण)। बेन प्रखंड-अंचल परिसर जमीन पर लगे पेड़ों की कटाई कर दी गई। जहां नीम, सिमल सहित बेर के कई पेड़ों की कटाई की गई है। बिना किसी के अनुमति के पेड़ों को काटा गया। यह लोगों में चर्चा का विषय बना है। और लोग सवाल खड़े कर रहे…
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बेन प्रखंड परिसर की घेराबंदी में काट दिए गए हरे-भरे पेड़, BDO-CO अनजान
बेन (नालंदा दर्पण)। एक ओर केंद्र सरकार से लेकर प्रदेश सरकार तक हर वर्ष करोड़ों रुपए पौधारोपण के लिए खर्च कर रही है। एक-एक पौधे लगाने के लिए काफी मेहनत किया जा रहा है, ताकि पर्यावरण को संतुलित करने का काम कर रही है तो दूसरी तरफ पेड़ों की कटाई की…
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5G या कुछ और? नालंदा में मैना पक्षियों की मौतों से लोगों में दहशत
बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण संवाददाता)। इन दिनों समूचे नालंदा जिले के ग्रामीण व शहरी इलाकों में पिछले कुछ दिनों से आम मैना (मैना पक्षी) की अचानक हो रही मौतों ने लोगों के होश उड़ा रखे हैं। खेतों में, सड़क किनारे, तालाबों के पास, पेड़ों की डालियों पर और बिजली के तारों पर…
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नालंदा विश्वविद्यालय कमल सागर के तट पर ‘बगुलों का सम्मेलन’ देख लोग दंग
नालंदा दर्पण डेस्क। अहले सुबह करीब सवा छह बजे का वक्त था। नालंदा विश्वविद्यालय के ठीक पीछे स्थित कमल सागर के किनारे वाला छोटा-सा शांत जलाशय कभी किसी का ध्यान नहीं खींचता था। लेकिन सुबह-सुबह प्रकृति ने वहाँ ऐसा दृश्य रचा कि जो भी गुजरा, वह रुक गया। मोबाइल निकाला और…
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गिद्धि और पुष्पकरणी जैसी धरोहर को बचाने की नई मुहिम, 45 आर्द्रभूमि चिह्नित
बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा की धरती ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर के लिए विश्व प्रसिद्ध है। अब यहां प्राकृतिक संपदा को संरक्षित करने की दिशा में एक नया कदम उठा रही है। इस जिले में 45 आर्द्रभूमियों को चिह्नित किया गया है। इनमें गिद्धि और पुष्पकरणी जैसी झीलें और तालाब पर्यावरणीय…
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Climate change: अब भारत के आकाश से लुप्त होगा सतरंगी इंद्रधनुष!
नालंदा दर्पण डेस्क। इंद्रधनुष प्रकृति का वह अनमोल तोहफा है, जो बारिश की बूंदों और सूरज की किरणों की मिलन से आसमान में सात रंगों का जादू बिखेरता है। हमेशा से मानव मन को आनंद और उम्मीद से भर देता है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक इंद्रधनुष को सौंदर्य,…









