अब नालंदा जिला शिक्षा कार्यालय पर तीसरी आँख की निगरानी

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। अब जिला शिक्षा कार्यालय में अब कोई भी गतिविधि नजरों से छिप नहीं सकेगी। विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए जिला शिक्षा विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। कार्यालय परिसर में 40 अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो हर कोने पर पैनी नजर रखेंगे। इसके साथ ही कर्मचारियों के बीच संभागों का फेरबदल कर एक नई कार्यशैली को बढ़ावा देने की कोशिश शुरू की गई है।
जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) आनंद विजय ने बताया कि यह कदम विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। अब हर गतिविधि पर नजर रहेगी। कोई भी कर्मचारी अपने कर्तव्यों से आँख नहीं चुरा सकेगा। हमारा लक्ष्य है कि शिक्षा विभाग का हर काम जनता के हित में और पूरी तरह पारदर्शी हो।
सीसीटीवी कैमरे उन संवेदनशील स्थानों पर लगाए गए हैं जहाँ फाइलों की आवाजाही, अधिकारियों की बैठकें और आम लोगों की शिकायतें दर्ज होती हैं। इन कैमरों की रिकॉर्डिंग से न केवल कर्मचारियों की कार्यशैली पर नजर रखी जाएगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई अनुचित गतिविधि न हो।
सीसीटीवी के साथ-साथ विभाग में कर्मचारियों के संभागों में भी बड़ा बदलाव किया गया है। जिन कर्मचारियों पर पहले लापरवाही या भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, उन्हें नए संभागों में स्थानांतरित कर दिया गया है। डीईओ ने इसे ‘क्लीन एडमिनिस्ट्रेशन ड्राइव’ का हिस्सा बताया, जिसका मकसद विभाग को भ्रष्टाचार-मुक्त और कार्यकुशल बनाना है।
इस फेरबदल से कर्मचारियों के बीच हलचल मच गई है। कुछ कर्मचारी इसे सकारात्मक बदलाव मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे अतिरिक्त दबाव के रूप में देख रहे हैं। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह कदम अच्छा है, लेकिन हमें उम्मीद है कि इसका इस्तेमाल सिर्फ निगरानी के लिए होगा, न कि कर्मचारियों को डराने के लिए।
डीईओ ने एक और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है, जिसमें शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से पूरी तरह मुक्त रखने का आदेश दिया गया है। यह कदम शिक्षकों को उनके मूल कार्य शिक्षण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उठाया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को इस निर्देश का सख्ती से पालन करने के लिए कहा गया है।
दरअसल पिछले कुछ समय से जिला शिक्षा कार्यालय में भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप चर्चा में रहे हैं। फाइलों को लटकाने, रिश्वतखोरी और अनुचित व्यवहार की शिकायतें आम हो गई थीं। ऐसे में सीसीटीवी निगरानी और फेरबदल जैसे कदमों से विभाग की छवि सुधारने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, स्थानीय लोगों और शिक्षक संगठनों की नजर इस बात पर है कि यह कदम कितना प्रभावी साबित होगा। एक स्थानीय शिक्षक संगठन के प्रतिनिधि ने कहा कि यह एक स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन इसे लागू करने में निरंतरता और निष्पक्षता जरूरी है। अगर यह सिर्फ दिखावा हुआ, तो जनता का भरोसा और कम होगा।
अब देखना है कि क्या यह निगरानी और फेरबदल वाकई विभाग की कार्यशैली में बदलाव ला पाएंगे? या फिर यह कदम समय के साथ कागजों में दबकर रह जाएगा? यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल नालंदा के शिक्षा विभाग में तीसरी आँख की निगरानी शुरू हो चुकी है और हर किसी की नजर इस बदलाव के परिणामों पर टिकी है।










