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नर्सों की संविदा पर होगी बंपर बहाली, 28 तक करें आवेदन, जानें डिटेल

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई पहल के तहत राज्य सरकार ने 5006 नर्सों (एएनएम) की संविदा आधारित बहाली की घोषणा की है। इस संबंध में राज्य स्वास्थ्य समिति ने विज्ञापन जारी कर आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए ऑनलाइन आवेदन की तिथि 14 अगस्त से 28 अगस्त तक निर्धारित की गई है।

यह नियुक्तियां 11 माह की संविदा अवधि के लिए होंगी, जिसमें प्रति माह 15 हजार रुपये का मानदेय दिया जाएगा। संतोषजनक कार्य और सेवा के आधार पर संविदा अवधि को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत 60 वर्ष की आयु तक बढ़ाया जा सकेगा।

राज्य स्वास्थ्य समिति के विज्ञापन के अनुसार इन 5006 नर्सों की नियुक्ति 4197 नर्सें स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर, 510 नर्सें राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत, 299 नर्सें शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों होगी।

ये नियुक्तियां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और राज्य के सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों में सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए की जाएंगी।

नर्सों की नियुक्ति के साथ-साथ राज्य में 498 ट्यूटर (नर्सिंग) पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। इन पदों के लिए 22 अगस्त को राज्य के विभिन्न जिलों में दो पालियों में परीक्षा आयोजित की जाएगी। यह कदम नर्सिंग शिक्षा को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

बिहार सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए व्यापक स्तर पर नर्सों की नियुक्ति कर रही है। वर्तमान में 16,000 से अधिक नर्सों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। जिसमें से 11,389 स्टाफ नर्सों की नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

बिहार तकनीकी सेवा आयोग के माध्यम से इन पदों के लिए 30 जुलाई, 31 जुलाई, 1 अगस्त और 8 अगस्त को परीक्षाएं आयोजित की जा चुकी हैं। इन परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों पर 8 से 11 अगस्त तक ऑनलाइन आपत्तियां दर्ज की गई हैं और अब चयन प्रक्रिया शुरू होने वाली है।

नई नर्सों और ट्यूटरों की नियुक्ति से सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर और त्वरित सेवाएं मिलेंगी। साथ ही मौजूदा स्टाफ पर कार्य का दबाव कम होगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। यह पहल न केवल मरीजों के लिए राहतकारी होगी, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगी।

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