
बेन (नालंदा दर्पण)। बेन प्रखंड में 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दो सरकारी स्कूलों में हुई लापरवाही ने सबको चौंका दिया। इन स्कूलों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा उल्टा फहराया गया। जिसके बाद यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। यह घटना न केवल लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि उन शिक्षकों और स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाती है, जिनके कंधों पर बच्चों के भविष्य को संवारने का दायित्व है।
15 अगस्त की सुबह बेन गांव के मध्य सह उच्च माध्यमिक विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यालय प्रधान प्रमोद कुमार ने शिक्षकों, शिक्षिकाओं, छात्र-छात्राओं, स्थानीय थानाध्यक्ष, बीडीओ और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
लेकिन हैरानी की बात यह रही कि तिरंगा उल्टा फहराया गया। इस गलती को देखकर वहां मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। हालांकि स्कूल प्रशासन ने इसे तुरंत ठीक करने की कोशिश की, लेकिन तब तक यह घटना कैमरों में कैद हो चुकी थी।
दूसरी घटना नवसृजित प्राथमिक विद्यालय झण्डुविगहा में सामने आई। यहां भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर झंडोत्तोलन के दौरान तिरंगे को उल्टा फहराया गया। बताया जाता है कि इस स्कूल में झंडे को दो बार उतारा गया और तीसरी बार में विद्यालय प्रभारी ने इसे फिर से उल्टा फहरा दिया।
इस घटना का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं। जिसके बाद लोगों ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कुछ लोगों ने इसे लापरवाही करार दिया तो कुछ ने इसे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान बताया।
इस मामले में मध्य सह उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रमोद कुमार से जब बात की गई, तो उन्होंने इसे एक मानवीय भूल बताया और कहा कि यह गलती से हो गया। जैसे ही हमें इसकी जानकारी मिली, कुछ ही मिनटों में झंडे को सीधा कर दिया गया। स्कूल स्टाफ की ऐसी कोई मंशा नहीं थी। यह सब अनजाने में हुआ। हालांकि, उनकी इस सफाई के बावजूद सोशल मीडिया पर लोगों की नाराजगी कम होने का नाम नहीं ले रही।
सोशल मीडिया पर इस घटना के वायरल होने के बाद लोगों ने अपनी भड़ास निकालनी शुरू कर दी। एक यूजर ने लिखा कि जिन शिक्षकों पर बच्चों को देशभक्ति सिखाने की जिम्मेदारी है, वे ही ऐसी गलती करें, यह शर्मनाक है।
वहीं एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि क्या स्कूलों में झंडा फहराने के नियमों की जानकारी नहीं दी जाती? यह लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। कुछ लोगों ने इस घटना को राष्ट्रीय ध्वज के अपमान से जोड़कर कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है।
बता दें कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा देश की आन, बान और शान का प्रतीक है। इसे फहराने के लिए फ्लैग कोड ऑफ इंडिया- 2002 में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसके अनुसार तिरंगे का केसरिया रंग हमेशा ऊपर और हरा रंग नीचे होना चाहिए। उल्टा झंडा फहराना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह राष्ट्रीय ध्वज का अपमान भी माना जाता है।
ऐसे में इस तरह की घटनाएं न केवल लापरवाही को उजागर करती हैं, बल्कि यह भी सवाल उठाती हैं कि क्या स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों को इन नियमों की पर्याप्त जानकारी दी जाती है।
इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। नालंदा जिला शिक्षा विभाग ने भी इस मामले पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी गलतियां दोबारा न हों। तिरंगा फहराने के नियमों की उचित ट्रेनिंग दी जाए। ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचा जा सके।





