
बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह प्रखंड हरनौत क्षेत्र में ग्रामीण विकास की तस्वीर उतनी सुनहरी नहीं है, जितनी की अपेक्षा की जाती है। हरनौत प्रखंड की पोआरी पंचायत अंतर्गत अलीनगर गांव को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने वाला संपर्क पथ लंबे समय से उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। ग्रामीण विकास मंत्री सरवन कुमार भी इसी जिले के नालंदा विधान सभा क्षेत्र से आते हैं, लेकिन उनकी अबतक की सारी गतिविधि अपने क्षेत्र तक ही सीमित रह गई है।
यह कच्चा रास्ता गर्मी में धूल का गुबार उड़ाता है तो बरसात में कीचड़ और दलदल का सबब बन जाता है। इस मार्ग की बदहाल स्थिति ने न केवल अलीनगर, बल्कि कौशलपुर, बिरमपुर, लंघौरा, मिरदाहाचक और धर्मपुर जैसे आधा दर्जन गांवों के निवासियों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
एनएच-30ए से अलीनगर को जोड़ने वाला यह संपर्क पथ महज 500 मीटर लंबा है, लेकिन इसकी स्थिति इतनी दयनीय है कि ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में इस रास्ते पर डेढ़ से दो फीट तक कीचड़ जमा हो जाता है, जिससे पैदल चलना तो दूर वाहनों का आवागमन भी असंभव-सा हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग से राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंचने में सामान्य दिनों में जहां आधा किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, वहीं बरसात में रास्ता अवरुद्ध होने पर उन्हें दो से ढाई किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे न केवल समय और संसाधनों की बर्बादी होती है, बल्कि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने जैसे कार्य भी प्रभावित होते हैं।
इस बदहाल मार्ग का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं है, बल्कि इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ रहा है। पुलिस गश्ती दल को इस रास्ते से गुजरने में भारी कठिनाई होती है। कई बार पुलिस की गाड़ियां कीचड़ में फंस जाती हैं, जिसके चलते नियमित गश्त प्रभावित होती है।
इसका नतीजा यह है कि क्षेत्र में चोरी और अन्य असामाजिक गतिविधियों में वृद्धि देखी जा रही है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि यह मार्ग पक्का हो जाए तो पुलिस की गश्त आसान होगी और असामाजिक तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
स्थानीय निवासियों ने इस समस्या को कई बार प्रशासन के समक्ष उठाया है। महिला संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से भी इस मुद्दे को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों की मांग है कि इस संपर्क पथ का शीघ्र पक्कीकरण किया जाए। ताकि गर्मी में धूल और बरसात में कीचड़ की समस्या से निजात मिल सके। उनका कहना है कि एक पक्का मार्ग न केवल उनकी आवाजाही को सुगम बनाएगा, बल्कि आसपास के सभी गांवों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह प्रखंड में इस तरह की बदहाली विकास के बड़े-बड़े दावों पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात तो की जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। इस संपर्क पथ का पक्कीकरण न केवल स्थानीय निवासियों की जिंदगी को आसान बनाएगा, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास में भी योगदान देगा।
बहरहाल हरनौत प्रखंड के अलीनगर और आसपास के गांवों की यह समस्या केवल एक सड़क की नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की प्राथमिकताओं और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी को दर्शाती है। प्रशासन से अपेक्षा है कि वह ग्रामीणों की इस जायज मांग को गंभीरता से ले और संपर्क पथ के पक्कीकरण के लिए शीघ्र कदम उठाए।





