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केन्या सरकार की टीम ने नालंदा में जीविकोपार्जन योजना लिया जायजा

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी सतत जीविकोपार्जन योजना अब न केवल राज्य में बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही है। इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और इसके जरिए महिलाओं के जीवन में आए बदलाव को समझने के लिए केन्या सरकार की 17 सदस्यीय टीम ने नालंदा जिले के राजगीर, रहुई और हरनौत का दौरा किया। दो दिनों तक चले इस भ्रमण में प्रतिनिधिमंडल ने योजना की कार्यप्रणाली, इससे जुड़ी प्रेरक कहानियां और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को करीब से देखा।

पहले दिन सुबह केन्या की टीम का राजगीर में पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। यहां आयोजित एक विशेष सत्र में अधिकारियों ने सतत जीविकोपार्जन योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों की पहचान कर उन्हें छोटे-छोटे व्यवसायों से जोड़ती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।

इसके बाद प्रतिनिधिमंडल को रहुई और हरनौत प्रखंडों में ले जाया गया। यहां टीम ने गांव की महिलाओं और स्थानीय परिवारों से सीधा संवाद किया। रहुई में बेबी देवी और पूजा देवी, जबकि हरनौत में डॉली देवी और रूपा देवी ने अपने अनुभव साझा किए।

इन महिलाओं ने बताया कि सतत जीविकोपार्जन योजना ने उन्हें नया आत्मविश्वास दिया है। वे अब न केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियों को संभाल रही हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी परिवार का सहारा बन गई हैं। इन कहानियों ने केन्या की टीम को गहरे तक प्रभावित किया।

दूसरे दिन प्रतिनिधिमंडल चेरो गांव पहुंचा, जहां उन्होंने पिंकी देवी से मुलाकात की। पिंकी देवी एक ग्रेजुएट हैं और दिव्यांग हैं। उनके पति भी दिव्यांग हैं, लेकिन इस दंपत्ति ने हिम्मत नहीं हारी। सतत जीविकोपार्जन योजना से जुड़कर उन्होंने एक छोटा व्यवसाय शुरू किया। आज उनकी आय से उन्होंने एक टोटो खरीदा है, जिसे उनके पति सुबह से शाम तक चलाते हैं। इस प्रेरक कहानी ने केन्या की टीम को खासा प्रभावित किया।

इसके बाद टीम हासनचक पहुंची, जहां उन्होंने मनिता देवी से बातचीत की। मनिता देवी भी ग्रेजुएट हैं और योजना से जुड़कर आत्मनिर्भर बनी हैं। यह दंपत्ति भी दिव्यांग है, लेकिन आज वे खुशी और सम्मान के साथ जीवन जी रहे हैं। इन कहानियों ने न केवल योजना की सफलता को दर्शाया, बल्कि यह भी दिखाया कि कैसे यह पहल समाज के सबसे कमजोर वर्गों को सशक्त बना रही है।

दोपहर बाद केन्या की टीम ने महिलाओं के समूह बैठकों में हिस्सा लिया। इन बैठकों में उन्होंने देखा कि महिलाएं किस तरह नियमित बचत करती हैं, हिसाब-किताब रखती हैं और सामूहिक निर्णय लेकर छोटे-छोटे व्यवसायों से अपनी आय बढ़ा रही हैं। महिलाओं ने बताया कि अब वे सीधे बाजार से जुड़ रही हैं और अपने उत्पादों को बेचकर आय के नए रास्ते तलाश रही हैं।

टीम को यह भी बताया गया कि मास्टर रिसोर्स पर्सन (एमआरपी) नियमित रूप से परिवारों की बैठकों में जाते हैं और उन्हें विभिन्न प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। साथ ही वे लाभुक परिवारों को सरकार की अन्य योजनाओं से जोड़ते हैं, जिससे उन्हें बहुआयामी लाभ मिल सके।

इसके बाद प्रतिनिधिमंडल तारा सीएलएफ की कार्यकारिणी बैठक में शामिल हुआ, जहां उन्हें योजना के क्रियान्वयन, समीक्षा और निगरानी की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया गया। महिला सदस्यों ने बताया कि वे सामूहिक रूप से निर्णय लेकर अपने समूह और परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार ला रही हैं।

केन्या की टीम ने इस दौरे को अत्यंत प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि बिहार की सतत जीविकोपार्जन योजना एक ऐसी मिसाल है, जिसे अन्य देश भी अपने यहां लागू कर सकते हैं। इस दौरे में जिला प्रशासन और जीविका के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

केन्या सरकार की 17 सदस्यीय टीम का यह दौरा न केवल बिहार की सतत जीविकोपार्जन योजना की सफलता को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे सामूहिक प्रयास और सरकारी पहल समाज के हर वर्ग को सशक्त बना सकती है। यह योजना नालंदा जिले की महिलाओं के लिए नई उम्मीद और आत्मविश्वास का प्रतीक बन चुकी है।

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