स्वास्थ्यनालंदाबिग ब्रेकिंगबिहार शरीफ

फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत सभी प्रखंडों में नाइट ब्लड सर्वे शुरू

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिले के 19 प्रखंडों में नाइट ब्लड सर्वे का कार्य शुरू हो चुका है। यह अभियान रात 8:30 बजे से शुरू होकर सरमेरा प्रखंड में 31 अगस्त तक, जबकि अन्य प्रखंडों में 27 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान प्रत्येक प्रखंड से 600 सैंपल लिए जाएंगे, वहीं सरमेरा प्रखंड में विशेष रूप से 900 सैंपल संग्रहित किए जाएंगे।

जिला वेक्टर बॉर्न डिजीज नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. राम मोहन सहाय ने बताया कि इस अभियान के तहत 18 प्रखंडों में दो सत्र और सरमेरा में तीन सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। सैंपल संग्रह का कार्य रात 8:30 बजे से 12 बजे के बीच किया जाएगा और यह केवल 20 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों से लिया जाएगा।

डॉ. सहाय ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव के लिए पहले मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम के तहत सभी लोगों को दवा खिलाई जाती है। इसके छह महीने बाद नाइट ब्लड सर्वे के माध्यम से सैंपल जांच कर यह आकलन किया जाता है कि दवा का प्रभाव कितना रहा। जिन व्यक्तियों का रिपोर्ट पॉजिटिव आता है, उन्हें 12 दिनों तक दवा दी जाती है।

उन्होंने बताया कि जिन लोगों को पहले से फाइलेरिया हो चुका है, उनके लिए सरकार द्वारा विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ऐसे मरीजों को यूडीआईडी (यूनिक डिसएबिलिटी आइडेंटिटी) कार्ड प्रदान किया जाता है। साथ ही मुख्यमंत्री पेंशन राहत योजना के तहत उन्हें प्रतिमाह 1100 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है।

सही और विश्वसनीय परिणाम सुनिश्चित करने के लिए सैंपल की जांच 24 घंटे के भीतर करना अनिवार्य है। इसके लिए सभी लैब टेक्नीशियनों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त पॉजिटिव सैंपल में से 10 प्रतिशत और निगेटिव सैंपल में से भी 10 प्रतिशत सैंपल को दोबारा जांच के लिए जिला स्तर पर भेजा जाएगा। यह प्रक्रिया जांच की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए अपनाई जा रही है।

फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी है, जो मुख्य रूप से शरीर के हाथ, पैर, हाइड्रोसिल और महिलाओं के स्तन को प्रभावित करती है। हाइड्रोसिल और स्तन फाइलेरिया का इलाज निःशुल्क ऑपरेशन के माध्यम से संभव है। हालांकि हाथ और पैर के फाइलेरिया का कोई स्थायी इलाज नहीं है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति लगातार पांच वर्षों तक दवा का सेवन करता है तो फाइलेरिया होने की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है। इसके लिए नियमित दवा का सेवन ही एकमात्र उपाय है।

स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से इस अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील की है। लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे नाइट ब्लड सर्वे में भाग लें और दवा का नियमित सेवन करें। यह अभियान न केवल फाइलेरिया के उन्मूलन में मदद करेगा, बल्कि जिले के लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.