
बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में नाबालिग लड़कियों के घर से भागने या लापता होने की घटनाएं चिंताजनक रूप से बढ़ रही हैं। सिलाव, गिरियक, राजगीर, इस्लामपुर, एकंगरसराय, हरनौत समेत अन्य क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं।
पिछले तीन वर्षों में इन मामलों में भारी वृद्धि देखी गई है, जहां औसतन हर साल 100 से अधिक नाबालिग लड़कियां लापता हो रही हैं। इनमें से अधिकांश मामले गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से जुड़े हैं, जिनकी उम्र 14 से 17 वर्ष के बीच है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और परिवार में संवाद की कमी इस प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रही है, जबकि पुलिस और प्रशासन की लापरवाही इसे और गंभीर बना रही है।
जुलाई 2024 में दीपनगर थाना क्षेत्र के लालबाग उत्क्रमित मध्य विद्यालय की पांच कक्षा 8 की छात्राओं के अचानक गायब होने से हड़कंप मच गया था। परिजनों ने अपहरण की आशंका जताते हुए एफआईआर दर्ज कराई।
जांच में पता चला कि चार सहेलियों को एक किशोर ने ई-रिक्शा से गोलापर गांव छोड़ा था, जहां से वे एक स्कॉर्पियो में सवार होकर वाराणसी की ओर रवाना हुई थीं। हालांकि कुछ दिन बाद छात्राएं लौट आईं, लेकिन घटना का असली कारण स्पष्ट नहीं हो सका।
इसी तरह, अगस्त 2025 में राजगीर के एक स्कूल की आठ छात्राएं रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गईं। ये सभी छबिलापुर थाना क्षेत्र में एक परिवार के साथ रहती थीं। सीसीटीवी फुटेज में उन्हें राजगीर के एक होटल के पास देखा गया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी छात्राओं को पटना के गांधी मैदान थाना क्षेत्र से बरामद कर लिया, लेकिन मामले की जांच अब भी जारी है।
20 अगस्त 2025 को एकंगरसराय थाना क्षेत्र के एक गांव से तीन स्कूली छात्राएं लापता हो गईं। इनमें से 14 वर्षीय मुस्कान घर लौट आई, लेकिन शनिया और नेहा अब तक गायब हैं। परिजनों ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई है, और पुलिस छापेमारी कर रही है।
सबसे हालिया घटना हरनौत थाना क्षेत्र के सबनहुआ-बबन बिगहा गांव की है, जहां 10 सितंबर 2025 को तीन किशोरियां निशोधरी कुमारी (12 वर्ष), मुस्कान कुमारी (17 वर्ष) और नीलम कुमारी (15 वर्ष) लापता हो गईं। परिजनों ने पुलिस से सकुशल बरामदगी की गुहार लगाई है। पुलिस के अनुसार मामले की जांच शुरू हो चुकी है और जल्द ही किशोरियों को बरामद करने का दावा किया है।
लोगों का कहना है कि इन घटनाओं के पीछे संगठित गिरोह सक्रिय हैं, जो नाबालिग लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाकर या बहला-फुसलाकर राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, कोलकाता और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में ले जा रहे हैं। कई मामलों में इन लड़कियों को मानव तस्करी के जाल में फंसाया गया है। पुलिस अक्सर इन मामलों को प्रेम प्रसंग मानकर गंभीरता से जांच नहीं करती, जिससे अपराधियों का हौसला बढ़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल लापता लड़कियों को बरामद करना पर्याप्त नहीं है। इन घटनाओं के मूल कारणों- परिवार में संवाद की कमी, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का अनियंत्रित उपयोग और सामाजिक जागरूकता की कमी पर ध्यान देना जरूरी है।
जागरूकता अभियान: स्कूलों और गांवों में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं।
पुलिस की सक्रियता: पुलिस को इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए संगठित गिरोहों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
पारिवारिक संवाद: माता-पिता को बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करनी चाहिए ताकि उनकी समस्याओं को समय रहते समझा जा सके।
सामुदायिक सहयोग: स्थानीय समुदाय को मिलकर निगरानी बढ़ानी चाहिए और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को देनी चाहिए।
बहरहाल, नालंदा जिले में नाबालिग लड़कियों के लापता होने की बढ़ती घटनाएं न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती हैं, बल्कि सामाजिक संरचना में गहरी खामियों को भी उजागर करती हैं।
यह समय की मांग है कि पुलिस, प्रशासन, स्कूल और समाज मिलकर इन घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं। केवल त्वरित बरामदगी ही समाधान नहीं है। इनके पीछे के कारणों को समझकर उन्हें जड़ से खत्म करना होगा।





