बिहारशरीफ में यहां कैलाश पर्वत की गुफा में दर्शन देगी मां काली

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ में दशहरा पूजा की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस अवसर पर शहर के विभिन्न स्थानों पर भव्य और आकर्षक पूजा पंडाल बनाए जा रहे हैं, जो भक्तों के लिए आस्था और कला का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रहे हैं। इनमें से एक है भैंसासुर का श्री काली पूजा समिति, जो इस बार अपने पंडाल को कैलाश पर्वत के स्वरूप में सजा रही है। इस पंडाल की सबसे खास बात यह है कि गुफा के अंदर मां काली की भव्य प्रतिमा विराजमान होगी, जो भक्तों को दर्शन देगी।
श्री काली पूजा समिति द्वारा इस बार पंडाल को कैलाश पर्वत का वास्तविक रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। पर्वत के शीर्ष पर एक विशाल शिवलिंग का निर्माण किया जा रहा है, और पूरा क्षेत्र बर्फ से ढका हुआ प्रतीत होगा। इसके लिए करीब 1200 मीटर जूट के बोरे और 1500 से अधिक छोटे-बड़े बांस का उपयोग किया गया है।
पंडाल को बनाने में प्लास्टर ऑफ पेरिस का भी इस्तेमाल हो रहा है, ताकि कैलाश पर्वत की प्राकृतिक बनावट को जीवंत किया जा सके। इस बार का पंडाल पिछले वर्षों की तुलना में और भी भव्य और अनूठा होगा, जो भक्तों और दर्शकों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।
पंडाल की एक और विशेषता है कैलाश पर्वत के नीचे बनाया जा रहा मानसरोवर का दृश्य। पंडाल में गोमुख से गंगा नदी के प्रवाह को भी दर्शाया जाएगा, जो इसे और भी जीवंत बनाएगा। इस दृश्य को देखने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग से सेल्फी प्वाइंट भी बनाया गया है, ताकि वे इस अद्भुत नजारे को अपने कैमरे में कैद कर सकें। इसके अलावा, पंडाल में व्यवस्था ऐसी की गई है कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
पंडाल के मुख्य आकर्षण के रूप में गुफा के अंदर 14 फीट ऊंची मां काली की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। गुफा के अंदर मां काली की अन्य शक्तियों को भी चित्रित किया जाएगा, जो दर्शन के लिए आए भक्तों को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेगा। पंडाल को और भी जीवंत बनाने के लिए विशेष साउंड इफेक्ट्स का उपयोग किया जाएगा, जिसमें पक्षियों की चहचहाहट और प्राकृतिक ध्वनियां शामिल होंगी। रात के समय पंडाल को आधुनिक लाइटिंग से सजाया जाएगा, जो इसे और भी मनोरम बनाएगा।
पंडाल निर्माण में 22 कारीगर पिछले दो महीनों से दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। इस भव्य पंडाल को तैयार करने में लगभग 15 लाख रुपये की लागत आने की संभावना है। समिति के सदस्यों का कहना है कि यह पंडाल न केवल भक्ति का केंद्र होगा, बल्कि कला और शिल्पकला का भी अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करेगा।







