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प्रकृति ने किसानों को बढ़ाई मुश्किलें, धान उत्पादक हुए निराश

बेन (नालंदा दर्पण)। मानसून की विदाई के ठीक मुहाने पर प्रकृति ने एक बार फिर किसानों पर कहर बरपाया है। अक्टूबर के अंतिम दिनों और नवंबर की शुरुआत में झमाझम बारिश ने बिहार के नालंदा जिले के बेन प्रखंड के किसानों की कमर तोड़ दी है। धान की फसल पककर कटाई के लिए पूरी तरह तैयार थी, लेकिन यह बेमौसम बारिश मौत बनकर टूट पड़ी। खेतों में खड़ी फसल जमीन पर गिर चुकी है, अंकुरित होने का खतरा मंडरा रहा है और कटाई का काम ठप्प हो गया है। किसान दिन-रात खेतों की रखवाली कर रहे हैं, लेकिन मौसम की मार से उनकी मेहनत पर पानी फिरता दिख रहा है। बंगाल की खाड़ी से उठे तूफान का असर पूरे जिले में फैल गया है, जिसने किसानों की चिंताएं दोगुनी कर दी हैं।

प्रखंड क्षेत्र में पिछले तीन-चार दिनों से लगातार हो रही बारिश ने धान की फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है। किसानों का कहना है कि धान की बालियां पककर सुनहरी हो चुकी थीं और कटाई का इंतजार था, लेकिन बारिश ने सबकुछ चौपट कर दिया। खेतों में पानी भर गया है, फसल गिरकर कीचड़ में सन चुकी है। कुछ जगहों पर धान में अंकुर फूटने की शुरुआत हो गई है, जो गुणवत्ता को पूरी तरह बर्बाद कर देगी। अगर मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो पूरी फसल सड़कर नष्ट हो जाएगी।

बेन प्रखंड के गांवों जैसे बेन, सोहसराय, मुरारपुर और आसपास के इलाकों में यह समस्या व्यापक है। किसान विनोद प्रसाद, लखन प्रसाद, अरविंद प्रसाद, विवेक सिंह, शिवकुमार सिंह, मनोज कुमार, खनौरी प्रसाद, महेश यादव, महेश पासवान और देवनन्दन पासवान जैसे सैकड़ों किसान इस संकट से जूझ रहे हैं।

किसानों ने बताया कि हमने महीनों की मेहनत से फसल उगाई। बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई पर हजारों रुपये खर्च किए। अब जब कटाई का समय आया तो बारिश ने सब लूट लिया। फसल जमीन पर गिर गई है, काट भी नहीं पा रहे हैं।

इसी तरह लखन प्रसाद ने दुखी मन से कहा कि पिछले साल भी सूखे की मार झेली थी, इस बार बारिश ने डबल झटका दिया। अगर सरकार ने सर्वे नहीं कराया और मुआवजा नहीं दिया तो हम कर्ज में डूब जाएंगे। किसानों ने एक स्वर में सरकार से गुहार लगाई है कि फसल क्षति का तुरंत आकलन कर मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि वे अगली फसल के लिए तैयार हो सकें।

शुरुआती सूखा, अब बेमौसम बारिश: डबल मार

यह साल धान उत्पादकों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं रहा। जून-जुलाई में मानसून की देरी और पानी की घोर किल्लत ने रोपाई को मुश्किल बना दिया था। किसानों को नहरों, कुओं और बोरिंग से जैसे-तैसे पानी जुटाना पड़ा। कई किसानों की रोपनी देरी से हुई, जिससे उत्पादन में कमी आई। अब जब फसल पककर खड़ी है, बेमौसम बारिश ने सबकुछ नष्ट करने की ठान ली है।

प्रखंड कृषि पदाधिकारी के अनुसार बेन में धान का रकबा करीब 5,000 हेक्टेयर से अधिक है, जिसमें से अधिकांश फसल बारिश से प्रभावित हुई है। किसान अरविंद प्रसाद ने कहा कि शुरू में पानी नहीं था, अब पानी ही पानी है। धान की खेती का पूरा चक्र बर्बाद हो गया। अंकुरित धान बाजार में नहीं बिकेगा, घाटा ही घाटा है। कुछ किसानों ने कटाई शुरू कर दी थी, लेकिन बारिश ने मजदूरों को खेतों में जाने से रोक दिया। कीचड़ भरे खेतों में काम करना असंभव हो गया है।

तूफान का असर और आगे की चुनौतियां

मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र से उठा तूफान पूरे बिहार में बारिश का कारण बना है। नालंदा जिले में यह असर सबसे अधिक दिख रहा है। किसानों की चिंता इसलिए और बढ़ गई है क्योंकि मौसम पूर्वानुमान में अगले दो-तीन दिनों तक बारिश की संभावना जताई गई है। अगर बारिश रुकी भी तो खेतों से पानी निकालने और फसल सुखाने में समय लगेगा, जिससे नुकसान और बढ़ेगा।

किसान विवेक सिंह ने चेतावनी दी कि अगर फसल नहीं बची तो रबी फसलों की बुआई भी प्रभावित होगी। गेहूं, चना और सरसों की तैयारी करनी है, लेकिन पूंजी कहां से लाएं? प्रखंड के अन्य किसानों जैसे शिवकुमार सिंह और मनोज कुमार ने भी यही बात दोहराई। वे सभी सरकार से त्वरित राहत की मांग कर रहे हैं।

सरकार से गुहार: सर्वे और मुआवजा जरूरी

किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से अपील की है कि तुरंत टीम गठित कर फसल क्षति का सर्वेक्षण किया जाए। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत दावे दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

कई किसानों ने बीमा कराया है, लेकिन बिना सर्वे के मुआवजा मिलना मुश्किल है। प्रखंड विकास पदाधिकारी ने आश्वासन दिया है कि शिकायतें मिलने पर टीम भेजी जाएगी, लेकिन किसान कहते हैं कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बहुत देर हो जाएगी।

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