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तिलैया-बिहारशरीफ-बख्तियारपुर रेललाइन के दोहरीकरण से मध्य बिहार को मिलेगी रफ्तार

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण ब्यूरो)। आप जरा कल्पना कीजिए कि एक ऐसा रेललाइन, जहां सुबह की पहली किरण के साथ ही ट्रेनें दौड़ने लगें, लोग झटपट पटना पहुंच जाएं और राजगीर तक पर्यटक बिना किसी देरी के पहुंच सकें। यह कल्पना अब हकीकत बनने को बेताब हैं।

भारतीय रेलवे मंत्रालय ने सितंबर 2025 में तिलैया-बिहारशरीफ-बख्तियारपुर रेललाइन के दोहरीकरण को 2192 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी हैं। करीब 104 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अगले चा सालों यानि 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य हैं।  जोकि नालंदा, पटना, गया और नवादा जिलों के सैकड़ों गांवों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए विकास की नई लहर लाएगा। यह न सिर्फ यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि उनके आर्थिक इंजन को भी फुल स्पीड देगा।Doubling of Tilaiya Biharsharif Bakhtiyarpur railway line will give speed to Central Bihar 2

बिहार का यह रेललाइन तिलैया से शुरू होकर बिहारशरीफ और बख्तियारपुर तक फैला हैं और वर्तमान में यह एकल ट्रैक पर चलता हैं। जिससे यहां ट्रेनें लाइन लगाकर इंतजार करती हैं।  मालगाड़ियां घंटों रुकती हैं और यात्री थकान महसूस करते हैं। लेकिन दोहरीकरण के बाद ट्रेनें दोगुनी संख्या में दौड़ेंगी, गति बढ़ेगी और सुरक्षा का स्तर चढ़ेगा।

रेलवे अफसरों के मुताबिक इससे ट्रेन परिचालन न सिर्फ तेज होगा, बल्कि सुरक्षित और सुगम भी होगा। सभी हॉल्ट स्टेशनों पर 450 मीटर लंबे प्लेटफॉर्म और क्रॉसिंग स्टेशनों पर 600 मीटर के प्लेटफॉर्म बनेंगे। कुल मिलाकर रेललाइन की क्षमता, गति और कनेक्टिविटी में जबरदस्त उछाल आएगा।

यह धार्मिक पर्यटन के लिए भी एक बड़ा तोहफा माना जा रहा है। बुद्ध सर्किट के राजगीर, जैन सर्किट के पवित्र स्थल और मखदूम सर्किट के तीर्थों तक पहुंचना अब बच्चों का खेल हो जाएगा। जरा कल्पना कीजिए कि कोई दिल्ली से राजगीर पहुंचे और बिना किसी प्लेटफॉर्म की जद्दोजहद के होटल चेक-इन कर ले। नालंदा विश्वविद्यालय के इतिहास प्रेमी पर्यटक भी अब झारखंड या पश्चिम बंगाल की यात्रा में देरी का शिकार नहीं होंगे। पटना और नालंदा के यात्रियों के लिए यह रूट झारखंड की ओर एक एक्सप्रेस हाईवे साबित होगा।Doubling of Tilaiya Biharsharif Bakhtiyarpur railway line will give speed to Central Bihar 3

यात्रियों के साथ-साथ व्यापारियों की भी चांदी हो जाएगी। कोयला, सीमेंट, ईंधन और खाद्यान्न जैसे आवश्यक सामानों का परिवहन अब घंटों के बजाय मिनटों में संभव हो सकेगा। अनुमान हैं कि माल ढुलाई में प्रतिवर्ष 26 मिलियन टन की बढ़ोतरी होगी। एनटीपीसी बाढ़ को झारखंड से कोयला लाने में यह रेललाइन जान बचेगा।

वर्तमान में जहां अधिकतम 24 बोगियों वाली ट्रेनें चलती हैं, वहीं दोहरीकरण के बाद तिलैया, नटेसर, राजगीर, नालंदा, बिहारशरीफ और हरनौत जैसे प्रमुख स्टेशनों पर 1750 मीटर लंबे प्लेटफॉर्म बनेंगे। यहां मालगाड़ियों की सेंटिंग और हॉल रोड की सुविधा भी विकसित होगी, जिससे एक इंजन से दो मालगाड़ियां खींची जा सकेंगी। बिहार के किसान, व्यापारी और उद्योगपति अब सपनों को बिना किसी चिंता के हकीकत में बदल सकेंगे।Doubling of Tilaiya Biharsharif Bakhtiyarpur railway line will give speed to Central Bihar 4

मुख्य अभियंता अनिल कुमार ने ‘नालंदा दर्पण’ से विशेष बातचीत में कहा कि यह परियोजना सिर्फ लोहे की पटरी बिछाने का नाम नहीं हैं। यह बिहार के गांवों को शहरों से जोड़ने का माध्यम बनेगा। हम 75 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित कर रहे हैं। 31 रेल गुमटियों को अंडरपास में बदलेंगे। राजगीर, बिहारशरीफ व हरनौत को छोड़कर बाकी सभी स्टेशनों और हॉल्टों पर 25 फीट ऊंचे ओवरब्रिज बनाएंगे। यात्रियों की सुविधा के लिए हर स्टॉपेज पर पेयजल, शौचालय और यात्रीशेड सुनिश्चित करेंगे।

इस परियोजना का तकनीकी पक्ष भी कम रोचक नहीं है। इस रेललाइन पर 17 बड़े पुल और 264 छोटे पुल-पुलियां बनेंगी। वर्तमान में 36 मोड़ हैं, जो दोहरीकरण के बाद बढ़कर 56 हो जाएंगे। लेकिन चिंता मत कीजिए। यह सब पर्यावरण के अनुकूल होगा।

सरकार का आंकलन हैं कि इससे प्रतिवर्ष 5 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी आएगी और 24 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन घटेगा। जोकि एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर हैं। यह बदलाव न सिर्फ हवा को साफ करेगा, बल्कि स्थानीय रोजगार भी पैदा करेगा। हजारों मजदूरों को काम मिलेगा और गांवों में आर्थिक उछाल आएगा।Doubling of Tilaiya Biharsharif Bakhtiyarpur railway line will give speed to Central Bihar 1

कहा जाता है कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान का जीता-जागता उदाहरण हैं। क्षेत्रीय विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला यह कदम बिहारवासियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा। यात्रा आसान, व्यापार तेज और खिलखिलाता पर्यटन सब कुछ एक पटरी पर दिखेगा। 2029 तक मध्य बिहार के गांव विकास एक्सप्रेस पर सवार हो चुके होंगे।

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