
इस्लामपुर (नालंदा दर्पण रिपोर्टर)। इस्लामपुर प्रखंड स्थित पान अनुसंधान केंद्र हर्बल गार्डन सिर्फ एक बगीचा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, ज्ञान और पर्यावरण के संतुलन का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। हर्बल गार्डन (औषधीय बाग) का महत्व स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण के लिए बहुत ज़्यादा है।
ये पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा के लिए कच्चे माल (जड़ी-बूटियाँ) का स्रोत हैं। लोगों को प्रकृति से जोड़ते हैं जागरूकता बढ़ाते हैं। जैव विविधता का संरक्षण करते हैं। तनाव कम करते हैं और स्थानीय समुदायों के लिए आय का स्रोत भी बन सकते हैं। बिहार में हर्बल गार्डन का औषधीय पौधों के बगीचे भी बहुत ज़रूरी हैं।
ये पारंपरिक चिकित्सा (आयुर्वेद) के लिए ज़रूरी जड़ी-बूटियों को सहेजते और उपलब्ध कराते हैं। छोटी-मोटी बीमारियों के घरेलू इलाज में मदद करते हैं। लोगों को प्रकृति और औषधीय पौधों की पहचान सिखाते हैं और भविष्य में नई दवाओं के विकास के लिए रिसर्च का आधार बनते हैं। खासकर आधुनिक जीवनशैली के तनाव और बीमारियों के लिए प्राकृतिक और सुरक्षित समाधान प्रदान करने के लिए हर्बल गार्डन क्यों ज़रूरी हैं।
अनुसंधान केन्द्र के प्रभारी एस.एन. दास ने नालंदा दर्पण को बताया कि यदि अश्वगंधा, तुलसी, एलोवेरा, सतावर, त्रिफला जैसी कई औषधीय पौधों को उगाते हैं तो इनसे बुखार, खांसी, जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। ये सिंथेटिक दवाओं के बजाय प्राकृतिक और सुरक्षित उपचार का विकल्प देते हैं। छात्रों, किसानों और आम लोगों को विभिन्न औषधीय पौधों की पहचान करने और उनके पारंपरिक उपयोग के बारे में सिखाते हैं लोगों को प्रकृति के करीब लाते हैं और प्रकृति से मिली सौगातों (जड़ी-बूटियों) के महत्व से अवगत कराते हैं।
उन्होंने कहा कि ये औषधीय पौधों की कई प्रजातियों को संरक्षित करते हैं, जो लुप्त हो रही हैं। भविष्य में बीमारियों के इलाज के लिए नई दवाएं विकसित करने के लिए अनुसंधान के लिए कच्चे माल (पौधों) का स्रोत बनते हैं। छोटे किसानों के लिए औषधीय पौधों की खेती आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि दवा कंपनियों द्वारा इनकी मांग बढ़ रही है। ये सामुदायिक स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देते हैं। इस प्रकार इस्लामपुर में हर्बल गार्डन स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का प्रयास कर रहें हैं।





