
हिलसा (नालंदा दर्पण रिपोर्टर)। अब ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को पूरा किए बिना इंडेन, भारत या अन्य पेट्रोलियम कंपनियों किसी भी उपभोक्ता को रसोई गैस का कनेक्शन नहीं देगा। गैस कनेक्शन उपभोक्ताओं के आधार कार्ड की डिटेल उनके मोबाइल नंबर पर ओटीपी प्रोसेस के द्वारा ही सत्यापित की जायेगी। पूरे नालंदा जिले में ई-केवाईसी की प्रक्रिया लागू कर दी गई हैं। जिन उपभोक्ताओं ने इ- केवाइसी नहीं कराया हैं, उन्हें आने वाले दिनों में सिलिंडर बुकिंग की सुविधा भी नहीं मिलेगी।
सभी कंपनियों ने रसोई गैस कनेक्शन से अलग बायोमैट्रिक प्रक्रिया के जरिए उपभोक्ताओं की पहचान से जुड़ी नयी सुविधा दी हैं। भारत गैस, इंडेन, एचपी एजेंसी के ग्राहकों को नए ई-केवाईसी के अंतर्गत पूरा विवरण अपडेट करना अनिवार्य कर दिया गया हैं।
ई-केवाईसी प्रक्रिया शुरू होने के बाद भारत इंडेन समेत सभी कंपनियों द्वारा इसके लिए जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। भारत सात लाख से अधिक कनेक्शनधारी ने ई-केवाईसी करायी हैं, इनमें उज्वला योजना के कनेक्शन भी शामिल हैं। लगभग 50 फीसदी गैस कनेक्शन धारकों ने अपना ई-केवाईसी कराया ही नहीं हुआ हैं।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने पिछले साल नया आदेश जारी कर कहा था कि जिन लोगों के नाम से कनेक्शन हैं, उन्हें स्वयं जाकर बताना होगा कि सिलिंडर लेने वाले वही हैं। समय सीमा अब 31 मार्च तक निर्धारित की गई हैं। सत्यापन के लिए कंपनियों ने उपभोक्ताओं से कोई शुल्क नहीं लिया हैं।
सभी एजेंसियों को ई-केवाईसी करने वाले उपभोक्ताओं के अंगूठे का निशान लगाना हैं, जिनके नाम से गैस ली जा रही हैं। नए नियम के अनुसार जो लोग ई-केवाईसी नहीं कराएंगे, उन्हें रसोई गैस सिलिंडर नहीं मिलेगा। कुछ कंपनियों ने इसके लिए ऑनलाइन सुविधा भी दी हैं।
सभी पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा अब तक लगभग आठ फीसदी बोगस कनेक्शन लॉक किए जा चुके हैं। एप में ई-केवाईसी सत्यापन नहीं होने पर ऐसे सभी कनेक्शन लॉक कर दिए जा रहे हैं। भारत, इंडेन, एचपी की ओर से जारी दिशा-निर्देश के अनुसार सुरक्षा की पुष्टि के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया अनिवार्य की गई हैं।
अब नए नियमों के अनुसार बोगस या फर्जी कनेक्शन को लॉक किया जा रहा हैं। कंपनियों ने उपभोक्ताओं से अपील की हैं। कि मार्च 2026 तक सभी ग्राहक अपना ई-केवाईसी अवश्य पूर्ण करा लें।





