
नगरनौसा (नालंदा दर्पण)। विभागीय उदासीनता से काफी लंबे समय से अपने जीर्णोद्धार की बाट जोह रहे प्राईमरी स्कूल बेलदरिया पावा में किसी भी समय अनहोनी की घटना हो सकती है। इस प्राईमरी स्कूल बेलदरिया में पावा कॉलोनी, बंगाली नगर और बेलदरिया के तकरीबन 127 बच्चे नामांकित है।
समाज के निचले तपके से आने और मेहनत मजदूरी करते हुए भी अभिभावक अपने बच्चों को उज्जवल भविष्य बनाने के लिए नजदीक के स्कूल में पढ़ने के लिए भेजते हैं। स्कूल में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या के बावजूद कमरों की कमी के कारण सभी बच्चे दो कमरों में ही पढ़ने को विवश है।
स्कूल के तीन कमरे पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है और किसी भी समय पूरी तरह से धाराशाही हो सकते हैं। वैसे सुरक्षा के दृष्टिकोण से इन तीनों कमरों को बंद रखा जाता है। परंतु बच्चे खेलते-खेलते क्षतिग्रस्त छत पर चले जाते हैं। इससे कभी कोई बड़ी अनहोनी घट सकती है।
प्रधान शिक्षक रोहित कुमार ने बताया कि विभाग का ध्यान आकृष्ट करने के बाद भी जब स्कूल के जीर्णोद्धार पर कोई ध्यान नहीं दिया गया तो बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल में उपलब्ध संसाधन से एक कमरा एवं बरामदा में अस्थायी तौर पर सेंटिग की गई है। ताकि छत एकाएक नीचे बच्चों पर न गिरे। फिर भी बच्चे दूसरे क्षतिग्रस्त कमरे और क्षतिग्रस्त छत पर यदा कदा चले जाते हैं।
मुखिया प्रतिनिधि धनंजय कुमार ने बताया कि सरकार हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का हर संभव प्रयास कर रही है। परंतु जब बच्चों की जान ही सुरक्षित नहीं होगा तो बच्चे सुरक्षित माहौल में शिक्षा कैसे ग्रहण करेंगे। हाल के दिनों में गिरियक प्रखंड के प्राईमरी स्कूल ईशापुर में स्कूल का छत गिरने से अनेकों बच्चे घायल हो गए थे। फिर भी विभाग की नींद नहीं खुली है।
अभिभावकों ने बताया कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए अपने बच्चों को स्कूल तो भेज देते हैं परंतु किसी अनहोनी का डर हमेशा लगा रहता है। इसलिए अफसरों से गुजारिश है कि स्कूल क्षतिग्रस्त भाग को तोड़कर नए कमरे बनाने के कार्य करें।





