
बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। मॉडल अस्पताल से मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों में ले जाने के गोरखधंधे पर अब जिला प्रशासन ने निर्णायक प्रहार की तैयारी कर ली है। लगातार मिल रही शिकायतों और ठोस कार्रवाई के अभाव में पनप रही अवैध गतिविधियों को देखते हुए जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने अस्पताल परिसर में अत्याधुनिक एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कैमरे लगाने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य न सिर्फ संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखना है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना भी है।
दरअसल लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि कुछ आशा कार्यकर्ता गरीब, अशिक्षित और असहाय मरीजों को सरकारी इलाज के बजाय निजी अस्पतालों में ले जाने के लिए बरगलाती हैं। इसके एवज में उनसे मोटी रकम वसूली जाती है। कई मामलों में कार्रवाई भी हुई, प्राथमिकी तक दर्ज हुई, लेकिन व्यवस्था में स्थायी सुधार नहीं हो सका। अब जब मामला सीधे डीएम तक पहुंचा, तो प्रशासन ने तकनीक के सहारे सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।
डीएम कुंदन कुमार ने सिविल सर्जन को स्पष्ट निर्देश दिया है कि मरीजों की सुविधा के साथ-साथ अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को भी चाक-चौबंद किया जाए। शिकायतें केवल आशा कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं हैं। कई बार अस्पताल के गार्ड भी अपनी ड्यूटी छोड़कर मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने या अन्य बहानों से इधर-उधर घूमते पाए गए हैं। ऐसे में आशा और गार्ड दोनों की गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी हो गया है।
प्रशासन की विशेष चिंता अस्पताल का लेबर रूम है, जिसे अवैध गतिविधियों का मुख्य केंद्र माना जा रहा है। यहीं से मरीजों को निजी अस्पताल भेजने, महंगे दामों पर ब्लड उपलब्ध कराने और बिना ब्लड चढ़ाए पैसे वसूलने जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं।
पूर्व में इन मामलों में एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। हाल ही में एसडीओ के औचक निरीक्षण के दौरान लेबर रूम में 5-6 आशा कार्यकर्ताओं को हीटर जलाकर बैठे पाए जाने की घटना ने भी प्रशासन को गंभीर सोचने पर मजबूर कर दिया।
डीएम ने यह भी बताया कि कुछ ऐसी आशा कार्यकर्ता हैं, जिनके खिलाफ पहले से प्राथमिकी दर्ज है, फिर भी वे बेखौफ होकर अस्पताल परिसर में घूमती पाई गई हैं। ऐसे लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। लेबर रूम में आशा की मौजूदगी पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई होगी।
इसके अलावा डीएस (डिप्टी सुपरिंटेंडेंट) प्रतिदिन अस्पताल का निरीक्षण करेंगे और कैमरों के माध्यम से गतिविधियों की मॉनिटरिंग सुनिश्चित करेंगे। डॉक्टरों की उपस्थिति, दवाओं की उपलब्धता और जांच सुविधाओं पर भी नियमित नजर रखी जाएगी।
फिलहाल मॉडल अस्पताल में 50 सामान्य सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिनकी निगरानी कमांड एंड कंट्रोल रूम से की जाती है। ये कैमरे सामान्य गतिविधियों को रिकॉर्ड करते हैं। अब इनके साथ 7 से 8 प्रमुख स्थानों पर एआई कैमरे लगाए जाएंगे, जहां से मरीजों को निजी अस्पताल ले जाने की घटनाएं अधिक सामने आती रही हैं।
एआई कैमरे सामान्य सीसीटीवी से कहीं अधिक उन्नत तकनीक पर आधारित होते हैं। ये न केवल वीडियो रिकॉर्ड करते हैं, बल्कि व्यक्ति की पहचान, चेहरे की पहचान, गतिविधियों का विश्लेषण, ऑब्जेक्ट ट्रैकिंग और कम रोशनी में भी स्पष्ट तस्वीर लेने में सक्षम होते हैं। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, जिससे भविष्य में कार्रवाई करना आसान होगा।
प्रशासन का मानना है कि एआई तकनीक के इस्तेमाल से मॉडल अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं पर अंकुश लगेगा और गरीब मरीजों को उनका हक सरकारी और मुफ्त इलाज बिना किसी डर या धोखे के मिल सकेगा। अब देखना यह है कि यह तकनीकी पहल जमीनी स्तर पर कितनी कारगर साबित होती है।







