एसएस बालिका प्लस टू विद्यालय में एडमिट कार्ड के नाम पर छात्राओं से अवैध वसूली

नालंदा दर्पण डेस्क। बिहारशरीफ स्थित एसएस बालिका प्लस टू विद्यालय में इंटरमीडिएट की छात्राओं से प्रैक्टिकल परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी करने के नाम पर 60-60 रुपये की नाजायज वसूली किए जाने की सूचना है।
जानकारी के अनुसार विद्यालय प्रशासन ने छात्राओं और उनके अभिभावकों को एडमिट कार्ड लेने के लिए बुलाया था। इस दौरान जिन छात्राओं ने 60 रुपये जमा नहीं किए, उन्हें एडमिट कार्ड देने से साफ इन्कार कर दिया गया। जबकि सोमवार से ही इंटरमीडिएट की प्रैक्टिकल परीक्षाएं शुरू होनी थीं। परीक्षा में बैठने की मजबूरी के कारण छात्राएं किसी तरह पैसे जुटाकर राशि देने को विवश हो गईं।
छात्राओं का आरोप है कि विरोध करने पर प्रैक्टिकल परीक्षा में कम अंक देने की धमकी तक दी गई। कई छात्राओं ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि यह पूरी वसूली विद्यालय के प्रधानाध्यापक के निर्देश पर की जा रही है। उनका कहना है कि यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी बैग सहित अन्य लाभुक योजनाओं के नाम पर उनसे पैसे लिए जा चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि एसएस बालिका प्लस टू विद्यालय में बड़ी संख्या में छात्राएं अध्ययनरत हैं। जिनमें से अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर, गरीब और मजदूर परिवारों से आती हैं। ऐसे में 50-60 रुपये जैसी छोटी राशि भी उनके परिवारों के लिए अतिरिक्त बोझ बन जाती है। अच्छे अंक और परीक्षा में बिना किसी बाधा के शामिल होने की उम्मीद में छात्राएं मजबूरी में पैसे देने को विवश हो रही हैं।
इस मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है क्योंकि हाल ही में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि विद्यालयों में निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त किसी भी प्रकार की राशि छात्र-छात्राओं से नहीं ली जाएगी। इसके बावजूद जिले के कई विद्यालयों से अवैध वसूली की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जो विभागीय आदेशों की खुली अवहेलना को दर्शाती हैं।
इस संबंध में जब एसएस बालिका प्लस टू विद्यालय के प्रधानाध्यापक से सवाल किया गया तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि एडमिट कार्ड एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। छात्राओं की सहमति से इसे अच्छे पेपर पर प्रिंट कराया गया है, जिस पर अधिक खर्च आता है। इसी कारण छात्राओं से 60 रुपये लिए जा रहे हैं।
वहीं इस मामले पर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एडमिट कार्ड ए-4 साइज पेपर पर दिया जाना है। अच्छे पेपर के नाम पर छात्राओं से राशि लेना गलत है। यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित प्रधानाध्यापक पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सभी शिकायतों की जांच कराई जाएगी। छात्राओं से अलग राशि लेना पूरी तरह अवैध है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग केवल बयानबाजी तक सीमित रहेगा या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई होगी? महिला शिक्षा और सशक्तिकरण की बात करने वाली व्यवस्था में यदि छात्राओं को उनके अधिकार के लिए भी पैसे देने पड़ें तो यह पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।





