
बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। देश के तीन राज्यों में फैले साइबर ठगी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश करते हुए ओडिशा की भुवनेश्वर पुलिस ने कतरीसराय निवासी गिरोह के सरगना समेत 12 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है।
इस कार्रवाई से नालंदा जिले के कतरीसराय क्षेत्र में सक्रिय साइबर फ्रॉड नेटवर्क की परतें खुल गई हैं। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह अब तक 20 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी को अंजाम दे चुका है।
गिरफ्तार किए गए 12 आरोपितों में 7 नालंदा जिले के कतरीसराय के रहने वाले हैं, जबकि 4 केरल और 1 ओडिशा का निवासी है। पुलिस ने आरोपितों के पास से 60 मोबाइल फोन, कई लैपटॉप, गिफ्ट कार्ड, एक चार पहिया वाहन, केरल लॉटरी टिकट और बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री बरामद की है।
इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी का खुलासा ओडिशा के पुलिस कमिश्नर सुरेश देव दत्ता सिंह ने भुवनेश्वर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया।
भुवनेश्वर पुलिस के अनुसार इस गिरोह का नेतृत्व देवाशीष त्रिपाठी, अर्जुन राज उर्फ बिट्टू, विजय कुमार और कतरीसराय निवासी पंकज उर्फ चांदनी कर रहे थे। पंकज उर्फ चांदनी के साथ उसका भाई ऋषि और सहयोगी बिहू भी इस साइबर फ्रॉड रैकेट के अहम सदस्य बताए जा रहे हैं।
बीते कुछ महीनों से भुवनेश्वर के बडागढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत टैंकापानी रोड स्थित देवाशीष त्रिपाठी के घर को ठगी के ‘कंट्रोल रूम’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, जहां से गुप्त रूप से ठगी का संचालन हो रहा था।
इस गिरोह का नाम इससे पहले भी कानून के रडार पर आ चुका है। झारखंड के हजारीबाग साइबर थाना ने 4 सितंबर 2021 को कतरीसराय निवासी मनोज कुमार चौरसिया को ट्रेन से गिरफ्तार किया था। पूछताछ में मनोज ने अपने पूरे नेटवर्क का खुलासा किया था। उस समय गिरोह में संतोष उर्फ सन्ना उर्फ मैनना, हरि चेतरू कुमार उर्फ हरिया उर्फ छोटू, बबलू कुमार, पंकज उर्फ चांदनी और मिथलेश कुमार उर्फ बुकल जैसे नाम सामने आए थे। हजारीबाग साइबर थाना कांड संख्या 35/2021 में इन सभी को आरोपी बनाया गया था।
भुवनेश्वर पुलिस ने बताया कि सरगना और अन्य बदमाशों ने साइबर फ्रॉड के जरिए अकूत संपत्ति अर्जित की है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि पंकज उर्फ चांदनी के कतरीसराय के अलावा पटना और शेखपुरा में भी प्लॉट और शोरूम हैं।
पुलिस अब इन संपत्तियों की पहचान कर जब्ती की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य ठिकानों व सहयोगियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पंकज और उसके सहयोगियों की भुवनेश्वर में गिरफ्तारी की खबर जैसे ही कतरीसराय के अन्य साइबर फ्रॉड करने वालों तक पहुंची, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। सूत्रों का कहना है कि कई स्थानीय फ्रॉड अलर्ट हो गए हैं और कुछ ने तो इलाका भी छोड़ दिया है।
पुलिस के मुताबिक यह गिरोह पुराने लेकिन बेहद प्रभावी साइबर फ्रॉड पैटर्न पर काम कर रहा था। गिफ्ट वाउचर, केरल लॉटरी, विभिन्न फाइनेंस कंपनियों और बैंकों से लोन दिलाने का झांसा देकर बिहार, ओडिशा और केरल में रैकेट चलाया जा रहा था। गिरोह के कुछ सदस्य दूसरों के नाम पर बैंक खाते उपलब्ध कराते थे, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम ट्रांसफर करने में किया जाता था।
फिशिंग साइट्स के जरिए एसबीआई, पीएनबी, रेलवे टिकट, फ्लिपकार्ट, अमेजन, मीशो, नापतौल, प्रधानमंत्री रोजगार योजना, बिजली बिल, किसान योजना, बैंक कस्टमर केयर और बिहार बोर्ड मैट्रिक पास मार्कशीट जैसे झूठे लिंक भेजकर लोगों को जाल में फंसाया जाता था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस डिजिटल जाल के जरिए 20 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई।
ओडिशा पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई अभी शुरुआत है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े नामों के सामने आने की संभावना है। नालंदा समेत अन्य राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों पर भी इसका असर साफ तौर पर दिखने लगा है।





