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विधायक रुहेल रंजन ने उठाई इस्लामपुर को नया अनुमंडल बनाने की मांग, विधानसभा में गूंजा मुद्दा

बिहार विधानसभा में विधायक रुहेल रंजन ने हिलसा अनुमंडल की बढ़ती आबादी व प्रशासनिक कठिनाइयों को लेकर इस्लामपुर को अलग अनुमंडल बनाने की मांग उठाई

हिलसा (नालंदा दर्पण)। बिहार विधानसभा में इस्लामपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रुहेल रंजन ने इस्लामपुर और एकंगरसराय प्रखंड को मिलाकर नया अनुमंडल गठित करने की जोरदार मांग उठाई। उन्होंने सदन का ध्यान क्षेत्र की बढ़ती जनसंख्या, विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र और प्रशासनिक कठिनाइयों की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था अब आम जनता की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं रह गई है।

विधायक ने बताया कि फिलहाल इस्लामपुर और एकंगरसराय दोनों प्रखंड हिलसा अनुमंडल के अंतर्गत आते हैं, जिसका गठन लगभग 50 वर्ष पहले हुआ था। उस समय अनुमंडल की आबादी करीब पांच लाख थी, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर लगभग 15 लाख तक पहुंच चुकी है। जनसंख्या में तीन गुना वृद्धि के बावजूद प्रशासनिक ढांचा जस का तस है, जिससे लोगों को रोजमर्रा के कार्यों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि इस्लामपुर प्रखंड के कई दूरस्थ गांवों से हिलसा स्थित अनुमंडल कार्यालय और न्यायालय तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को करीब 40 से 50 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों के लिए भी लंबी यात्रा करनी पड़ती है, जिससे समय के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। खासकर गरीब और ग्रामीण तबके के लिए यह स्थिति बेहद कष्टदायक है।

विधायक रुहेल रंजन ने यह भी रेखांकित किया कि बढ़ती आबादी और क्षेत्रफल के कारण हिलसा अनुमंडल पर कार्यों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसका सीधा असर आम जनता को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि इस्लामपुर को अलग अनुमंडल का दर्जा दिया जाता है, तो प्रशासनिक कामकाज में तेजी आएगी और लोगों को स्थानीय स्तर पर ही सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

मामले पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए प्रभारी मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि फिलहाल राज्य में नए अनुमंडलों के गठन की कोई प्रक्रिया नहीं चल रही है।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में जब भी इस दिशा में कोई पहल की जाएगी, तब संबंधित क्षेत्र की जरूरतों और माननीय सदस्य द्वारा उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

विधानसभा में यह मामला उठने के बाद इस्लामपुर और आसपास के क्षेत्रों में उम्मीद की एक नई किरण जगी है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि इस्लामपुर को अनुमंडल का दर्जा मिल जाता है तो न सिर्फ प्रशासनिक कामों में तेजी आएगी, बल्कि शिक्षा, न्याय और विकास से जुड़ी सेवाओं तक लोगों की पहुंच भी आसान हो जाएगी। क्षेत्र के लोगों को अब सरकार के अगले कदम का इंतजार है।स्रोत: इस्लामपुर रिपोर्टर

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