
हिलसा (नालंदा दर्पण)। हिलसा अनुमंडलीय अस्पताल में मरीजों को बेहतर और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। इस अस्पताल में जीविका के माध्यम से हाउसकीपिंग और लाउंड्री (कपड़ा धुलाई) सेवा का संचालन शुरू कर दिया गया है। विभागीय निर्देश के बाद शुरू की गई इस व्यवस्था का उद्देश्य अस्पताल परिसर की साफ-सफाई के साथ-साथ कपड़ों की स्वच्छता व्यवस्था को भी बेहतर बनाना है।
अस्पताल में अब तक जीविका के माध्यम से मरीजों और उनके साथ आने वाले लोगों को गुणवत्तापूर्ण एवं स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा था। इसके बाद हाउसकीपिंग और लाउंड्री सेवा की जिम्मेदारी भी जीविका से जुड़े समूहों को मिलने से अस्पताल की विभिन्न सेवाओं में उनकी भागीदारी और बढ़ गई है।
रोजगार के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
बिहार सरकार की जीविका पहल का एक प्रमुख उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें सशक्त, स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाना है। अस्पताल जैसी संस्थाओं में सेवा से जुड़ी जिम्मेदारियां मिलने से जीविका दीदियों को नियमित काम के साथ नए कौशल सीखने और अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने का अवसर भी मिल रहा है।
जीविका हिलसा के बीपीएम राजेश कुमार के अनुसार जीविका अब बहुआयामी क्षेत्रों में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जीविका से जुड़ी महिलाएं पहले की अपेक्षा अधिक शिक्षित और जागरूक हो रही हैं तथा नए रोजगार के अवसरों से जुड़कर आगे बढ़ रही हैं।
अस्पताल की व्यवस्था में बढ़ेगी स्वच्छता
हाउसकीपिंग सेवा शुरू होने से अस्पताल परिसर की नियमित साफ-सफाई पर जोर रहेगा, जबकि लाउंड्री सेवा के जरिए अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले कपड़ों की धुलाई और स्वच्छता व्यवस्था को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। इससे मरीजों के साथ अस्पताल आने वाले लोगों को भी अपेक्षाकृत बेहतर और स्वच्छ वातावरण मिलने की उम्मीद है।
इस मौके पर अस्पताल उपाधीक्षक एसके सुधाकर, अस्पताल मैनेजर अनुराग कुमार, जीविका हिलसा के बीपीएम राजेश कुमार, क्षेत्रीय समन्वयक पुष्पा कुमारी, सामुदायिक समन्वयक अनीता कुमारी, निभा कुमारी और शशिकांता कुमारी, आईटी से जुड़ी अनु कुमारी सहित दर्पण संकुल संघ की प्रतिनिधि शकुंतला देवी, ललिता देवी और गुड़िया देवी तथा सेवा में कार्यरत कर्मी मौजूद रहे।
खास बात यह है कि अस्पताल में भोजन से लेकर साफ-सफाई और कपड़ों की धुलाई तक विभिन्न सेवाओं में जीविका की भागीदारी बढ़ रही है। इससे एक ओर अस्पताल की व्यवस्थाओं को स्थानीय स्तर पर सहयोग मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुल रहे हैं।
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