इस्लामपुर में मेडिएशन फॉर नेशन-2 के तहत कानूनी जागरूकता शिविर

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। न्याय सिर्फ फैसला नहीं, बल्कि समाधान है और समाधान का सबसे मानवीय रास्ता संवाद है। इसी संदेश को लेकर इस्लामपुर प्रखंड के कोचरा कुशवाहा भवन में मेडिएशन फॉर नेशन-2 अभियान के तहत एक प्रभावशाली कानूनी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के तत्वावधान में तथा मुख्य न्यायाधीश, पटना उच्च न्यायालय के निर्देशन में संपन्न हुआ। पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू इन्हीं के द्वारा मेडियेशन फोर नेशन 2.0 को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया है
कार्यक्रम का संयुक्त नेतृत्व नालंदा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह जिला जज गुरुविन्दर सिंह मलहोत्रा, सचिव राजेश कुमार गौरव, अनुमंडलीय विधिक सेवा समिति हिलसा के अध्यक्ष सह एडीजे आलोक कुमार पाण्डेय तथा सचिव सह एसडीजेएम शोभना स्वेतांकी ने किया। आयोजन में पैनल अधिवक्ता विजय कुमार और हिलसा अनुमंडल कार्यालय के लीगल सर्विस सेंटर में प्रतिनियुक्त पीएलवी आलोक कुमार की सक्रिय भूमिका रही।
कार्यक्रम के दौरान पैनल अधिवक्ता विजय कुमार ने मेडिएशन फॉर नेशन-2 की अवधारणा को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि यह भारत की न्यायिक व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य विवादों का शीघ्र, सुलभ और सौहार्दपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना है।
उन्होंने बताया कि इस अभियान को देश के माननीय न्यायाधीशों, विशेषकर उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों का सक्रिय समर्थन प्राप्त है। पटना उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश द्वारा मध्यस्थता को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया है।
उन्होंने कहा कि मध्यस्थता से समय, धन और मानसिक तनाव तीनों की बचत होती है। पारिवारिक, वैवाहिक, संपत्ति, श्रम और वाणिज्यिक विवादों में यह प्रक्रिया अत्यंत कारगर साबित हो रही है। मेडिएशन एक्ट-2023 की भावना को जन-जन तक पहुंचाना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है, ताकि न्याय व्यवस्था अधिक जनहितैषी और प्रभावी बन सके।
कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से रखा गया कि विवादों को अदालत तक ले जाने से पहले मध्यस्थता को अवश्य अवसर देना चाहिए, क्योंकि संवाद से निकला समाधान ही स्थायी होता है। न्याय तभी सार्थक है, जब वह समाज में शांति, विश्वास और सौहार्द को मजबूत करे।
इस अवसर पर पीएलवी आलोक कुमार ने जानकारी दी कि 14 मार्च 2026 को हिलसा एवं बिहार शरीफ में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी सुलहनीय एवं अन्य मामलों का त्वरित निपटारा किया जाएगा। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से इसका लाभ उठाने की अपील की।
कार्यक्रम में सामाजिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत बताया गया कि कानूनी रूप से विवाह के समय लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित है। इसके लिए बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 बनाया गया, जो 1 नवंबर 2007 से लागू है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता रही। उपस्थित लोगों में छोटेलाल कुमार, शिवनाथ कुमार, गिरानी देवी, मुन्नी देवी, कामनी देवी, पिंकी देवी, वाल्मीकि प्रसाद, रविन्द्र कुमार, विजय सिंह, अजीत कुमार, रामजी महतो, सीताराम महतो, कुलदीप मेहता, सूर्यमणी देवी, खुशबू कुमारी, रामतारा देवी, संगम कुमारी, साधना देवी, नीलम देवी, रानी देवी, रेखा देवी, नूतन देवी, अशोक कुमार, अरुण चौरसिया, रूवी वर्मा सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।
कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि संवाद ही समाधान है और मध्यस्थता ही न्याय का मानवीय स्वरूप।





