प्रसूता की मौत के बाद निजी प्रसव केंद्र में हंगामा, तोड़फोड़

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार थाना क्षेत्र के बैगनाबाद स्थित एक निजी प्रसव केंद्र में एक प्रसूता की मौत के बाद परिजनों ने क्लिनिक पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। इस दौरान गुस्साए परिजनों ने क्लिनिक में तोड़फोड़ भी की। मृतका की पहचान सारे थाना क्षेत्र के झरहा गांव निवासी राजकुमार यादव की पत्नी किरण देवी (22 वर्ष) के रूप में हुई है।
मृतका के भाई ने बताया कि किरण को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर शुक्रवार की सुबह बैगनाबाद के एक निजी प्रसव केंद्र में भर्ती कराया गया था। क्लिनिक की संचालिका और एएनएम सीमा ने परिजनों को आश्वासन दिया कि नॉर्मल डिलीवरी संभव है और कोई जटिलता नहीं है। करीब तीन घंटे तक इंतजार करने के बाद अचानक डॉक्टरों ने परिजनों को सूचित किया कि स्थिति गंभीर है और तत्काल ऑपरेशन की जरूरत है।
ऑपरेशन के बाद बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन इसके तुरंत बाद क्लिनिक में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद क्लिनिक के स्टाफ ने मोबाइल चोरी का बहाना बनाकर उन्हें करीब एक घंटे तक उलझाए रखा। इस दौरान उन्हें किरण की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद अचानक एक एंबुलेंस मंगवाकर किरण को उसमें लोड कर दिया गया और परिजनों से कहा गया कि उसे तुरंत दूसरे अस्पताल ले जाया जाए।
परिजन किरण को बिहारशरीफ के एक अन्य निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। गुस्साए परिजन जब वापस प्रसव केंद्र पहुंचे तो देखा कि क्लिनिक का गेट बंद था और संचालिका सीमा समेत पूरा स्टाफ मौके से फरार हो चुका था। इससे परिजनों का गुस्सा और भड़क गया। उन्होंने किरण के शव को क्लिनिक के बाहर रखकर हंगामा शुरू कर दिया और क्लिनिक के गेट व खिड़कियों में तोड़फोड़ की।
सूचना मिलने पर बिहार थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और गुस्साई भीड़ को शांत कराने की कोशिश की। पुलिस ने परिजनों को शव का पोस्टमार्टम कराने की सलाह दी, ताकि मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके। हालांकि, मृतका के पति राजकुमार यादव ने पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया।
बिहार थाना के प्रभारी ने बताया कि इस मामले में अभी तक कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि लिखित आवेदन मिलने पर क्लिनिक के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हम मामले की गंभीरता को समझते हैं और जांच के लिए तैयार हैं।
किरण की मौत की खबर फैलते ही झरहा गांव में मातम छा गया। परिवारवाले और स्थानीय लोग इस हादसे से स्तब्ध हैं। परिजनों का कहना है कि किरण की मौत पूरी तरह से क्लिनिक के स्टाफ और डॉक्टरों की लापरवाही का नतीजा है।
किरण के भाई ने बताया कि क्लिनिक ने पहले नॉर्मल डिलीवरी की बात कही। फिर अचानक ऑपरेशन की जरूरत बताई। ऑपरेशन के बाद भी हमें सही जानकारी नहीं दी गई। अगर समय पर सही इलाज मिला होता, तो शायद मेरी बहन आज जिंदा होती।
हालांकि, बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है और उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। लेकिन मां की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव के लोग भी इस घटना को लेकर आक्रोशित हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इस घटना ने निजी क्लिनिकों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का आरोप है कि बैगनाबाद के इस प्रसव केंद्र में न तो पर्याप्त सुविधाएं थीं और न ही योग्य डॉक्टर मौजूद थे। ऑपरेशन के दौरान क्या हुआ, इसका कोई स्पष्ट जवाब क्लिनिक की ओर से नहीं दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के छोटे-मोटे क्लिनिक अक्सर बिना उचित लाइसेंस और सुविधाओं के संचालित होते हैं, जिसके कारण इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं।
पुलिस ने बताया कि क्लिनिक की संचालिका और स्टाफ के फरार होने के कारण अभी तक उनकी ओर से कोई बयान दर्ज नहीं किया जा सका है। पुलिस ने आसपास के इलाकों में क्लिनिक स्टाफ की तलाश शुरू कर दी है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को भी इस मामले की जानकारी दी गई है, ताकि क्लिनिक के लाइसेंस और संचालन की जांच की जा सके।
इस बीच किरण के परिवार ने मांग की है कि दोषी क्लिनिक संचालिका और स्टाफ के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। गांव के कुछ लोग इस मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन से शिकायत करने की भी तैयारी कर रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को उजागर करती है। निजी स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में त्वरित कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।










