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गजब ! 20 साल पहले असुरक्षित घोषित भवन में चल रहा है राजगीर अनुमंडलीय अस्पताल

Amazing! Rajgir sub-divisional hospital is running in a building declared unsafe 20 years ago

अस्पताल प्रबंधन द्वारा भवन के जर्जर हालत और दुर्दशा से भवन निर्माण विभाग के पदाधिकारियों को अनेकों बार अवगत कराया गया है। अनेकों बार पत्राचार किया गया है, लेकिन भवन विभाग द्वारा इस संबंध में कोई पहल नहीं की जा रही है…

नालंदा दर्पण डेस्क। अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन शहर राजगीर अवस्थित अनुमंडलीय अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग जर्जर हो गयी है। यह पूरी तरह असुरक्षित हो गयी है। इस कारण भवन निर्माण विभाग द्वारा वर्ष 1996-97 में इसे पहली बार असुरक्षित घोषित किया गया था। बाद में मरम्मत कर इस पुरानी भवन को काम चलाऊ बनाया गया। लेकिन रखरखाव के अभाव में यह भवन फिर जर्जर हो गया है। बावजूद इस जर्जर भवन में अस्पताल का काम किया जा रहा है। अस्पताल कर्मी जान जोखिम में डालकर नियमित ड्यूटी करते हैं।

अस्पताल का यह भवन इतना जर्जर है कि जहां तहां से छत टूट कर गिर रहा है। थोड़ी सी वर्षा होने पर छत से पानी टपकने लगता है। कई दिनों तक छत से पानी का सीपेज होते रहता है। उस परिस्थिति में इस भवन में काम करना मुश्किल हो जाता है। कंप्यूटर और अस्पताल के टेबल पर रखे गये रेकर्ड को पॉलिथीन सीट से ढकने की नौबत आ जाती है। तब सरकारी कामकाज पूरी तरह ठप हो जाती है।

इस बिल्डिंग में अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक का कार्यालय है। इसी बिल्डिंग में अस्पताल प्रबंधक, एकाउंटेंट, कंप्यूटर ऑपरेटर, अनुमंडलीय अस्पताल कार्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कार्यालय, मीटिंग हॉल, दवा भंडार, टीबी वार्ड, टीबी मरीजों की पैथोलॉजी जांच, कोविड जांच, कोविड टीकाकरण, बच्चों का टीकाकरण और अस्पताल के मरीजों का रजिस्ट्रेशन सहित अनेक कार्य किया जा रहा है।

अस्पताल कर्मी बताते हैं कि वे लोग जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहे हैं। किसी समय कोई भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। अस्पताल कर्मचारियों के अनुसार जर्जर भवन में जान जोखिम में डालकर स्वास्थ्य कर्मी काम करने के लिए मजबूर हैं। ऐसे भवन में काम करते हुए वे खतरों के खिलाड़ी बन गए हैं। यहां कभी भी हादसा हो सकता है। कर्मी दहशत में काम करते हैं।

कंप्यूटर ऑपरेटर बताते हैं कि कभी कंप्यूटर पर तो कभी छत की ओर नजर रखते हुए ड्यूटी करना पड़ता है। भगवान का नाम लेकर कर्मी भवन में प्रवेश करते हैं। उनकी नजर बरबस छत की ओर लगी रहती है। 1970-71 में बना यह अस्पताल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। कमरों की तरह पोर्टिको की हालत भी काफी जर्जर और खतरनाक है।

जानकर बताते हैं कि 1996-97 में पहली बार इस अस्पताल भवन को बिल्डिंग डिपार्टमेंट द्वारा अकार्यरत घोषित किया गया है। मेल-फिमेल वार्ड, मीटिंग हॉल सहित इस भवन में कुल 25 कमरे और दो पोर्टिको हैं। इस भवन में सात अलग अलग शौचालय भी है, जिसमें सभी जेनरल शौचालय अकार्यरत है।

भवन की जर्जर हालत को देखते हुए 2018-19 में इस बिल्डिंग से प्रसव वार्ड और डिलीवरी रूम को नये बिल्डिंग में शिफ्ट करा दिया गया है। मरीजों के इलाज से संबंधित सभी कार्य नये अस्पताल भवन में किया जा रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि जिस तरह प्रसव वार्ड और डिलीवरी रूम के नये बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया है, उसी तरह पुरानी बिल्डिंग से नये बिल्डिंग में कार्यालय को भी शिफ्ट कर देना चाहिए।

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