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गजब स्कूलः यहां एक हीं घर के 4 शिक्षक एक ब्लैकबोर्ड पर पढ़ा रहे 2 क्लास!

बेन (नालंदा दर्पण)। शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन बेन प्रखंड के एक स्कूल की स्थिति इन दावों को मुंह चिढ़ाती नजर आ रही है। खैरा पंचायत के प्राथमिक विद्यालय मखदूमपुर में न तो पर्याप्त कमरे हैं, न ही बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पा रही है।

ताजा आलम यह है कि एक ही कमरे में दो-दो कक्षाएं संचालित हो रही हैं और एक ही ब्लैकबोर्ड पर दो शिक्षक एक साथ पढ़ाते हैं। यह नजारा देखकर सवाल उठता है कि यह शिक्षा का मजाक नहीं तो और क्या है?

इस विद्यालय में 200 से अधिक छात्र नामांकित हैं और 9 शिक्षक भी तैनात हैं। लेकिन तीन कमरों में से एक को कार्यालय और भंडारण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बच्चे दो कमरों में पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को ठूंसा जा रहा है।

यहां एक कमरे में दो कक्षाएं एक साथ चलती हैं। दो शिक्षक एक ही ब्लैकबोर्ड पर अलग-अलग विषय पढ़ाते हैं। ऐसे में बच्चे और शिक्षक दोनों असहज महसूस करते हैं और शिक्षा की गुणवत्ता का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस स्कूल में एक ही परिवार के चार शिक्षक तैनात हैं। पिंकु कुमार, सुरेंद्र प्रसाद सिंह और देवेंद्र सिंह जैसे स्थानीय लोग सवाल उठाते हैं कि जब एक ही परिवार के चार शिक्षक हैं तो बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?

ग्रामीण नित्यानंद प्रसाद और दिलीप कुमार ने बताया कि 25 साल बीत जाने के बाद भी स्कूल में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। न तो पर्याप्त कमरे हैं, न ही बच्चों के लिए ठीक रास्ता। बरसात में स्थिति काफी गंभीर हो गई है।

विद्यालय प्रभारी सुलेखा कुमारी ने बताया कि कमरों की कमी के कारण यह स्थिति बनी हुई है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी दी है और कई अधिकारी निरीक्षण भी कर चुके हैं। लेकिन समस्या का समाधान अब तक नहीं हुआ। इस संबंध में बीईओ पुष्पा कुमारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका मोबाइल नंबर-8544411701 बंद पाया गया।

बहरहाल, यह बदहाल स्कूल शिक्षा के अधिकार और लोक कल्याणकारी योजनाओं के दावों को शर्मसार कर रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि स्कूल में अतिरिक्त कमरों का निर्माण हो और बच्चों के लिए बेहतर रास्ते का इंतजाम हो। अब क्या जिम्मेदार अधिकारी इस अजब-गजब कहानी को गंभीरता से लेंगे या यह स्कूल और इसके बच्चे व्यवस्था की उपेक्षा झेलते रहेंगे?

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