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बौद्ध सर्किट फोरलेन पर मुआवजे का ब्रेक, किसानों-प्रशासन की बैठक बेनतीजा, रैयत जहर की पुड़िया लेकर पहुंचे

राजगीर (नालंदा दर्पण)। अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन नगरी राजगीर को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी बौद्ध सर्किट फोरलेन सड़क परियोजना एक बार फिर मुआवजे के विवाद में उलझ गई है। राजगीर-सालेपुर बौद्ध सर्किट मार्ग के लिए चल रहे भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच प्रखंड मुख्यालय सभागार में हुई बैठक बेनतीजा रही।

बैठक में जिला एवं अनुमंडल प्रशासन के अधिकारियों ने नगर पंचायत सिलाव के किसानों से अपील की कि वे सड़क निर्माण कार्य शुरू होने दें। अधिकारियों का कहना था कि उचित मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए अग्रेतर कार्रवाई की जा रही है और यदि कहीं त्रुटि है तो उसे सुधारा जाएगा।

हालांकि किसानों ने साफ शब्दों में दो टूक जवाब दिया कि जब तक मुआवजा राशि तय कर उसका भुगतान नहीं किया जाता, जमीन नहीं देंगे। किसानों का आरोप है कि मुआवजा निर्धारण में गंभीर विसंगतियां हैं और औने-पौने दाम पर जमीन लेने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि सिलाव मौजा की जमीन का मूल्यांकन पड़ोसी पंचायत की तुलना में कम कर दिया गया है, जो न्यायसंगत नहीं है।

बैठक के दौरान माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब एक रैयत जहर की पुड़िया लेकर सभागार पहुंचे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उचित मुआवजा नहीं मिला तो वे आत्महत्या कर लेंगे।

किसानों ने सामूहिक रूप से कहा कि भुगतान से पहले वे किसी भी हाल में निर्माण कार्य शुरू नहीं होने देंगे। कुछ किसानों ने जबरन कार्य कराए जाने की स्थिति में आत्मदाह तक की चेतावनी दी।

राजगीर के एसडीओ सत्य प्रकाश, भू-अर्जन पदाधिकारी राजीव रंजन तथा जिला पंचायती राज पदाधिकारी ने किसानों को आश्वस्त किया कि मुआवजा निर्धारण में यदि कोई त्रुटि हुई है तो उसे दुरुस्त करने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रशासन का कहना है कि परियोजना क्षेत्र के विकास और पर्यटन को गति देने के लिए यह सड़क अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि राजगीर को बौद्ध सर्किट से जोड़ने वाली यह फोरलेन सड़क परियोजना राज्य सरकार की प्राथमिकता में है। इससे क्षेत्र में पर्यटन, रोजगार और आधारभूत संरचना के विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। लेकिन सिलाव क्षेत्र के किसानों में मुआवजे की दर को लेकर बढ़ता असंतोष फिलहाल परियोजना की रफ्तार पर ‘ब्रेक’ लगा रहा है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन किसानों की आपत्तियों का समाधान कितनी जल्दी और किस तरह करता है। जब तक सहमति का रास्ता नहीं निकलता, तब तक बौद्ध सर्किट की यह महत्वाकांक्षी सड़क योजना कागजों से आगे बढ़ती नहीं दिख रही।

समाचार स्रोत: मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट्स

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