
बेन (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के बेन थाना क्षेत्र अंतर्गत भातुबिगहा गांव इन दिनों अपराधियों के खौफ से सहमा हुआ है। कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती देती एक सनसनीखेज घटना में बेखौफ बदमाशों ने गांव के एक दंपति परिवार पर हमला बोलते हुए महिलाओं और पुरुषों की बेरहमी से पिटाई कर दी। लाठी-डंडों, ईंट-पत्थरों से किए गए इस हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका इलाज फिलहाल पावापुरी स्थित विमल अस्पताल में चल रहा है।
घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है, जबकि पीड़ित परिवार न्याय की आस में बेन थाना का चक्कर लगाने को मजबूर है। यह वारदात न केवल अपराधियों के बढ़ते मनोबल को दर्शाती है, बल्कि स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
भातुबिगहा में सुनियोजित हमला, महिलाओं तक को नहीं छोड़ा
पीड़ित परिवार की पहचान भातुबिगहा ग्राम निवासी अनुज सिंह, उनकी माता, भाभी, सास, भाई सहित अन्य परिजनों के रूप में हुई है। घायलों में सुमन देवी, शांति देवी, विकास कुमार और आकाश कुमार शामिल हैं। परिजनों के अनुसार बदमाशों ने पहले गाली-गलौज शुरू की और विरोध करने पर अचानक हमला कर दिया।
लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों से किए गए हमले में पीड़ितों का पूरा शरीर लाल पड़ गया है। गंभीर चोटों के कारण उन्हें पहले स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर बेहतर उपचार के लिए पावापुरी के विमल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
साइबर अपराध वर्चस्व के लिए बदमाशों ने कर रहे तांडव
घायल सुमन देवी और अनुज सिंह ने बताया कि बदमाश यह हमला जानबूझकर कर रहे हैं, ताकि गांव में उनका डर बना रहे और कोई उनके खिलाफ आवाज न उठा सके। पीड़ितों का कहना है कि आरोपी खुद को इलाके का सरगना समझते हैं और गांव के लोगों को धमकाकर चुप कराना चाहते हैं।
पीड़ित परिवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हमलावर कथित तौर पर साइबर अपराध से जुड़े हुए हैं और आसपास के दर्जनों गांवों के बदमाशों का जमावड़ा गांव के पास स्थित खंधों में होता है। कई दिनों से यह गतिविधि चल रही है, लेकिन पुलिस की ओर से अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
भातुबिगहा और आसपास के इलाकों में यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी इन्हीं बदमाशों पर कई गंभीर आरोप लग चुके हैं, लेकिन अब तक किसी भी मामले में निर्णायक कार्रवाई नहीं हो पाई है।
26 दिसंबर को पूर्व मुखिया के घर फायरिंग का मामला
पीड़ितों ने बताया कि 26 दिसंबर 2025 को इन्हीं बदमाशों ने पंचायत के पूर्व मुखिया के घर पर धावा बोल दिया था। उस दौरान न केवल परिजनों के साथ मारपीट की गई, बल्कि घर पर रोड़ेबाजी और फायरिंग भी की गई थी।
इस मामले में पूर्व मुखिया के परिजनों ने बेन थाना में लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन आज तक आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
16 जनवरी को बलिराम सिंह के घर रोड़ेबाजी
इसी तरह 16 जनवरी की देर रात गांव के ही बलिराम सिंह के घर पर बदमाशों ने चढ़कर गाली-गलौज और रोड़ेबाजी की थी। इस घटना को लेकर भी बेन थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई, लेकिन इस मामले में भी पुलिस अब तक किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। इन घटनाओं की कड़ी को देखा जाए तो साफ है कि अपराधियों को कानून का कोई डर नहीं रह गया है।
गोली लगने की खबर पर पीड़ितों ने जताई आपत्ति
घटना के बाद यह चर्चा भी सामने आई कि गोलीबारी में किसी को गोली लगी है। इस पर पीड़ितों ने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने कोई गोली नहीं चलाई तो गोली लगने का सवाल ही नहीं उठता।
पीड़ितों का आरोप है कि गोली लगने की बात बदमाशों के परिजनों द्वारा पुलिस को गुमराह करने के लिए कही जा रही है। उनका कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि किसे और कैसे गोली लगी।
पुलिस ने मानी गोलीबारी की बात, खोखा बरामद
इस पूरे मामले पर पुलिस पदाधिकारियों ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला दो पक्षों के बीच हुए हिंसक टकराव का प्रतीत होता है। पुलिस के अनुसार गोलीबारी की घटना में एक व्यक्ति को गोली लगने की बात सामने आई है। घटनास्थल से खोखा भी बरामद किया गया है।
पुलिस ने बताया कि पूछताछ के लिए कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ दिन पहले एकसारा पंचायत के पूर्व मुखिया के घर पर हुई फायरिंग में भी यही बदमाश आरोपी बताए गए थे।
फायरिंग, आगजनी और दहशत: पलायन को मजबूर परिवार
पीड़ित परिवार का दर्द यहीं खत्म नहीं होता। उन्होंने बताया कि 23 जनवरी 2026 को जब वे अपने घर के सामने बैठे थे, तभी चार-पांच बदमाश आए और अचानक मारपीट शुरू कर दी। इस घटना के बाद थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
पीड़ितों का आरोप है कि उसी रात बदमाशों ने उनके घर पर आठ से दस राउंड फायरिंग की। इसके बाद शनिवार की रात बदमाशों ने फिर से घर को निशाना बनाते हुए अंधाधुंध फायरिंग की और एक मोटरसाइकिल में आग लगा दी।
इन घटनाओं के बाद पूरे परिवार में भय का माहौल है। पीड़ित परिवार का कहना है कि जब शिकायत के बावजूद बदमाशों की गिरफ्तारी नहीं हो रही, तो उनके पास गांव छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
“जिंदगी बचानी है तो गांव छोड़ना पड़ेगा”
पीड़ित परिवार ने दर्द भरे शब्दों में कहा कि वे अपने ही गांव में खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बदमाश खुलेआम जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।
पीड़ितों ने कहा कि हमने थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब अगर जिंदगी बचानी है, तो कहीं और जाकर रहना ही बेहतर होगा। यह बयान क्षेत्र की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
थानाध्यक्ष का बयान- दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए बेन थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। थानाध्यक्ष रविराज सिंह ने बताया कि पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और इलाके में शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे।
ग्रामीणों में डर और आक्रोश, प्रशासन पर बढ़ा दबाव
भातुबिगहा की यह घटना अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है। ग्रामीणों में भय के साथ-साथ आक्रोश भी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अपराधियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि यदि अपराधियों पर लगाम नहीं लगाई गई तो आम नागरिकों का भरोसा कानून से उठता चला जाएगा।
(बेन से नालंदा दर्पण के लिए पत्रकार रामावतार की रिपोर्ट)





