बड़ी कार्रवाईः सूबे में फिर 146 विशेष सर्वेक्षण कर्मी बर्खास्त

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने संविदा शर्तों का उल्लंघन करने वाले 146 विशेष सर्वेक्षण कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी है। यह कार्रवाई हड़ताल में शामिल कर्मियों के खिलाफ विभाग की सख्ती का हिस्सा है, जो अनुशासनहीनता और संविदा नियमों के उल्लंघन के चलते की गई। बर्खास्त कर्मियों में 97 विशेष सर्वेक्षण अमीन, 24 विशेष सर्वेक्षण कानूनगो और 25 विशेष सर्वेक्षण लिपिक शामिल हैं। भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय ने जिलों से प्राप्त प्रतिवेदनों के आधार पर यह आदेश जारी किया।
विभाग के अनुसार ये कर्मी पदनाम परिवर्तन, नियमितीकरण और समतुल्य वेतनमान जैसी मांगों को लेकर हड़ताल पर थे। विभाग ने इन्हें अनुचित और संविदा नियमावली 2019 व संशोधित नियमावली 2022 के खिलाफ माना। आदेश में स्पष्ट किया गया कि संविदा के तहत नियुक्ति किसी भी स्थिति में नियमित नियुक्ति में परिवर्तित नहीं होगी। विभाग ने हड़ताल को अनुशासनहीनता मानते हुए सख्त कदम उठाया ताकि राजस्व महा-अभियान का कार्य प्रभावित न हो।
बिहार सरकार ने भूमि विवादों और जमाबंदी सुधार से जुड़े मामलों में आम लोगों को त्वरित राहत देने के लिए राजस्व महाअभियान को और तेज करने का फैसला लिया है। 16 अगस्त से 20 सितंबर तक चल रहे इस अभियान के तहत सरकार ने हड़ताल से उत्पन्न रुकावटों को दूर करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की है। मंत्रिपरिषद ने कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) ई-गवर्नेस सर्विस इंडिया लिमिटेड नयी दिल्ली के माध्यम से 11,549 प्रशिक्षित कर्मियों को जोड़ने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
इसके तहत 10,936 कंप्यूटर ऑपरेटर-आवेदनों की तत्काल एंट्री और निस्तारण सुनिश्चित करेंगे। 537 अंचल स्तर के पर्यवेक्षक- स्थानीय स्तर पर अभियान की निगरानी करेंगे। 76 जिला स्तर के पर्यवेक्षक- जिला स्तर पर कार्य की समीक्षा और समन्वय करेंगे।
बता दें कि राजस्व महा-अभियान का उद्देश्य भूमि विवादों का त्वरित निपटारा और जमाबंदी सुधार को सुनिश्चित करना है। हड़ताल के कारण उत्पन्न व्यवधानों को दूर करने के लिए सरकार का यह कदम आम लोगों के लिए राहतकारी साबित हो सकता है। नए कर्मियों की तैनाती से आवेदनों का निस्तारण तेज होगा, जिससे बिहार के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भूमि से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।





