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हड़ताल: विम्स पावापुरी की ओपीडी सेवा ठप, मरीज परेशान

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। पावापुरी स्थित भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान (विम्स) में इंटर्न डॉक्टरों की बेमियादी हड़ताल ने अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। इस हड़ताल के कारण अस्पताल की ओपीडी (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) सेवा पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि इमरजेंसी सेवाएं पूर्ववत जारी हैं, ताकि गंभीर मरीजों के इलाज में कोई व्यवधान न आए।

इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि वे पिछले दो महीनों से अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्षरत हैं। उनकी मांगों में न्यूनतम 40,000 रुपये मासिक स्टाइपेंड और कार्यस्थल पर बेहतर सुविधाओं का प्रावधान शामिल है। हड़ताली डॉक्टरों ने बताया कि नियमानुसार हर तीन साल में इंटर्नशिप स्टाइपेंड में वृद्धि का प्रावधान है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

एक हड़ताली इंटर्न डॉक्टर ने नालंदा दर्पण को बताया, ‘हम 12 घंटे की ड्यूटी पूरी ईमानदारी से करते हैं, लेकिन हमें अपर्याप्त स्टाइपेंड और काम के दबाव का सामना करना पड़ता है। हमने कई बार पत्राचार और औपचारिक तरीकों से सरकार और विम्स प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। मजबूरन हमें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा,’

बता दें कि विम्स पावापुरी नालंदा और आसपास के क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इलाज के लिए आते हैं। ओपीडी सेवा बंद होने से सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए आने वाले मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। कई मरीजों को बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है।

हड़ताली डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि वे इमरजेंसी सेवाओं को प्रभावित नहीं होने देंगे। गंभीर मरीजों और आपातकालीन मामलों में इलाज जारी रहेगा। हालांकि, ओपीडी बंद होने से इमरजेंसी वार्ड पर मरीजों का दबाव बढ़ गया है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार इमरजेंसी सेवाओं को सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की जा रही है, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण यह चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

विम्स प्रबंधन ने अभी तक इस हड़ताल को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार प्रबंधन और इंटर्न डॉक्टरों के बीच बातचीत की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन अभी तक कोई समझौता नहीं हो सका है। दूसरी ओर बिहार सरकार की ओर से भी इस मामले में कोई ठोस पहल नहीं दिख रही है, जिससे इंटर्न डॉक्टरों का आक्रोश और बढ़ रहा है।

इंटर्न डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे। उनकी प्रमुख मांगों में वर्तमान में मिलने वाले स्टाइपेंड को बढ़ाकर 40,000 रुपये प्रतिमाह करने, डॉक्टरों के लिए उचित विश्राम कक्ष, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाएं, हर तीन साल में स्टाइपेंड की समीक्षा और वृद्धि का प्रावधान लागू करने की मांग शामिल हैं।

बहरहाल, अस्पताल में इएनटी, स्किन, आंख, दांत, कैंसर, हड्डी, शिशु रोग समेत कई रोगों की ओपीडी सेवा अचानक बंद हो जाने से यहां पहुंच रहे मरीजों की परेशानी बढ़ गयी है। प्रतिदिन यहां तकरीबन डेढ़ से दो हजार मरीज ओपीडी में इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। नालंदा समेत पड़ोसी जिला शेखपुरा एवं नवादा से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। लेकिन बेमियादी हड़ताल की वजह से अब ऐसे मरीजों को घर लौटने या फिर निजी क्लिनिकों व अस्पतालों में जाने की विवशता बन गयी है।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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