चिया सीड बना किसानों की नई उम्मीद, इस्लामपुर में चल रहा वैज्ञानिक परीक्षण

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। बदलते समय के साथ खेती भी अब परंपरागत फसलों से आगे बढ़कर औषधीय और सुपरफूड की ओर कदम बढ़ा रही है। इसी कड़ी में मगही पान अनुसंधान केंद्र, मेडिसिन प्लांट इस्लामपुर में इन दिनों चिया सीड्स जैसे औषधीय गुणों वाले पौधे पर वैज्ञानिक परीक्षण किया जा रहा है। यह प्रयोग न सिर्फ स्वास्थ्य के लिहाज से अहम माना जा रहा है, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में भी एक बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है।

चिया सीड्स को आज दुनिया भर में सुपरफूड के रूप में जाना जाता है। इनमें फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है, वजन नियंत्रित रहता है, ब्लड शुगर स्थिर होती है, हृदय स्वस्थ रहता है, हड्डियां मजबूत बनती हैं और त्वचा में निखार आता है। खासकर वजन घटाने के लिए चिया सीड्स को सुबह खाली पेट या भोजन से पहले लेने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह भूख को प्रभावी ढंग से कम करता है।

अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक शिवनाथ दास के अनुसार चिया सीड की खेती के लिए गर्म और सूखी जलवायु सबसे उपयुक्त होती है। इसकी बेहतर पैदावार के लिए 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान और अच्छी जल निकासी वाली रेतीली दोमट मिट्टी जरूरी है। चिया सीड की बुवाई का सही समय अक्टूबर से नवंबर के बीच होता है। बीज को लगभग 1.5 सेंटीमीटर गहराई में और 30 से 45 सेंटीमीटर की दूरी पर बोना चाहिए।

उन्होंने बताया कि फसल लगभग 100 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है। जब पौधों की पत्तियां सूखने लगें और बीज सख्त हो जाएं, तब कटाई का सही समय माना जाता है। औसतन प्रति हेक्टेयर 400 से 600 किलोग्राम तक उपज प्राप्त की जा सकती है। यह फसल कम पानी में तैयार हो जाती है और कीट-प्रतिरोधी होने के कारण इसमें लागत भी अपेक्षाकृत कम आती है।

चिया सीड की मार्केटिंग को लेकर भी वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके हेल्थ बेनिफिट्स और पौष्टिकता को प्रमुखता से प्रचारित किया जाए। आकर्षक पैकेजिंग, ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री, तथा ऑर्गेनिक ब्रांडिंग पर ध्यान देकर किसान और उद्यमी बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। वर्तमान में बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर हेल्थ कॉन्शियस ग्राहकों और पोषण से जुड़ी कंपनियों के बीच। किसान सीधे मंडी या ग्राहकों से जुड़कर 15,000 से 19,000 रुपये प्रति क्विंटल तक अच्छा भाव प्राप्त कर सकते हैं।

बिहार के कई जिलों विशेषकर जमुई जिले के किसान चिया सीड की खेती को एक लाभदायक विकल्प के रूप में देखने लगे हैं। ऐसे क्षेत्र जहां पानी की कमी है या चना जैसी पारंपरिक फसलें अपेक्षित मुनाफा नहीं दे पा रही हैं, वहां चिया सीड किसानों के लिए एक नई राह खोल सकता है।

कुल मिलाकर इस्लामपुर में चल रहा यह वैज्ञानिक परीक्षण न केवल खेती में नवाचार का उदाहरण है, बल्कि आने वाले समय में किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और स्वास्थ्य के क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

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