इस्लामपुरनालंदाबिग ब्रेकिंगहिलसा

बैरा गांव में विधिक जागरूकता शिविर, पीड़ित मुआवजा योजना की दी गई जानकारी

एसिड अटैक व यौन अपराध पीड़ितों को 7 लाख तक सहायता, लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों के निपटारे की अपील

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। इस्लामपुर प्रखंड के खुदागंज थानान्तर्गत बैरा गांव स्थित सामुदायिक भवन में बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार पटना के निर्देशन में नालंदा जिला विधिक सेवा प्राधिकार एवं अनुमंडलीय विधिक सेवा समिति हिलसा के संयुक्त आदेश पर बिहार पीड़ित मुआवजा योजना 2014 विषय पर एक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य आम लोगों को उनके कानूनी अधिकारों और सरकारी सहायता योजनाओं की जानकारी देना रहा।

कार्यक्रम का संचालन पैनल अधिवक्ता विजय कुमार एवं हिलसा विधिक सहायता केंद्र तथा खुदागंज थाना में प्रतिनियुक्त पीएलवी आलोक कुमार के कुशल नेतृत्व में किया गया।

शिविर की शुरुआत में पीएलवी आलोक कुमार ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार के गठन, उद्देश्य और कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्राधिकार द्वारा जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है, ताकि कोई भी व्यक्ति आर्थिक कमजोरी के कारण न्याय से वंचित न रह जाए।

इसके बाद पैनल अधिवक्ता विजय कुमार ने बिहार पीड़ित मुआवजा योजना की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह योजना वर्ष 2009 में बनाई गई थी, जो सीआरपीसी की धारा 357(ए) के तहत लागू है।

इस योजना के अंतर्गत अपराध के शिकार व्यक्तियों एवं उनके आश्रितों को चोट, विकलांगता, मृत्यु या अन्य नुकसान की भरपाई के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। विशेष रूप से एसिड अटैक और बलात्कार जैसी जघन्य घटनाओं की शिकार महिलाओं के पुनर्वास और जीवन स्तर में सुधार के लिए यह योजना बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बताया कि जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में क्रिमिनल इंज्यूरी कंपेन्सेशन बोर्ड का गठन किया गया है और यह योजना बिहार के सभी जिलों में लागू है। राज्य सरकार पीड़ितों के मूल अधिकारों की रक्षा के लिए नैतिक, सामाजिक और कानूनी रूप से बाध्य है। पहले एसिड अटैक और रेप पीड़िताओं को 3 लाख रुपये की सहायता दी जाती थी, जिसे वर्ष 2018-19 के संशोधन के बाद बढ़ाकर 3 से 7 लाख रुपये कर दिया गया है। यदि किसी पीड़िता का चेहरा एसिड अटैक से 80 प्रतिशत से अधिक क्षतिग्रस्त हो गया है तो उसे आजीवन प्रति माह 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी प्रावधान है।

जानकारी दी गई कि मुआवजे की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। इलाज पर होने वाला खर्च मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष से दिया जाता है, जिसकी राशि सीधे अस्पताल को ट्रांसफर की जाती है। मुआवजे के लिए आवेदन राज्य विधिक सेवा प्राधिकार या जिला विधिक सेवा प्राधिकार में किया जा सकता है।

इसके अलावा थानाध्यक्ष भी पीड़िता की ओर से डीएलएसए, एसएलएसए या एसडीएलएससी को आवेदन देकर मुआवजा दिलाने में पहल कर सकते हैं। आवेदन के लिए एफआईआर की प्रति, मेडिकल रिपोर्ट, पहचान पत्र, बैंक खाता विवरण, मृत्यु प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), शपथ पत्र, आश्रित प्रमाण पत्र एवं फोटो जैसे दस्तावेज आवश्यक बताए गए।

कार्यक्रम के समापन से पूर्व पीएलवी आलोक कुमार ने उपस्थित लोगों से अपील की कि आगामी 14 मार्च 2026 को जिला एवं अनुमंडल स्तर पर आयोजित होने वाली इस वर्ष की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक सुलहनीय मामलों का निष्पादन कराकर इसका लाभ उठाएं।

इस अवसर पर रूनो देवी, संगीता देवी, उर्मिला देवी, रीता देवी, मोनिका कुमारी, काजल कुमारी, सरिता देवी, रीना देवी, गीता देवी, अनिता देवी, किरण कुमारी, लुसी कुमारी, नीशा कुमारी, सविता देवी, सोनवर्षा देवी, बविता देवी, शरीफा देवी, रिकु देवी, कंचन देवी, रंजू देवी, बेबी कुमारी, सरोज देवी, अमृता कुमारी, नाजिया बानो, नासरीन खातून, रसीदा बेगम सहित नारायण कुमार, गौतम कुमार, मुन्ना, ओमप्रकाश चौधरी, सुरेश प्रसाद, विरजू कुशवाहा समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.