CM Rural Bridge Scheme: सोयबा और पंचाने नदी पर जल्द बनेंगे 6 पुल

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। CM Rural Bridge Scheme: नालंदा जिले में सोयबा और पंचाने नदियों पर छह नए ग्रामीण पुलों के निर्माण की योजना को प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से अस्थावां, रहुई और बिहारशरीफ प्रखंडों के दर्जनों गांवों के हजारों निवासियों को आवागमन में अभूतपूर्व सुविधा मिलेगी। इन पुलों के निर्माण से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन स्तर और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना के अंतर्गत इन छह पुलों का निर्माण लगभग 37 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया जाएगा। ग्रामीण कार्य विभाग के अनुसार टेंडर प्रक्रिया शीघ्र शुरू होने वाली है। जिसके बाद निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। ये पुल नालंदा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होंगे।

निर्माणाधीन पुलों की सूची में रहुई: आरसीडी रोड से शेरपुर के बीच सोयबा नदी पर 51.37 मीटर लंबा पुल, अस्थावां: पचेतन-मनोरमपुर के बीच सोयबा नदी पर 77.45 मीटर लंबा पुल, बिहारशरीफ: गंगा बिगहा के पास पंचाने नदी पर 96.84 मीटर लंबा पुल, बिहारशरीफ: हरगावां-नबाजीबिगहा के बीच सोयबा नदी पर 77.46 मीटर लंबा पुल, बिहारशरीफ: लालूनगर-तिऊरी के बीच पंचाने नदी पर 96.84 मीटर लंबा पुल, बिहारशरीफ: गुलनी-फतेहली के बीच पंचाने नदी पर 96.84 मीटर लंबा आरसीसी पुल शामिल हैं।

इन पुलों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की दशा और दिशा बदलने की उम्मीद है। उदाहरण के लिए, अस्थावां प्रखंड के मनोरमपुर गांव के निवासियों को वर्तमान में प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने के लिए 4-5 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। उन्हें चिस्तीपुर लिंक सड़क से रहुई प्रखंड के हुसैनपुर होकर मुख्य सड़क तक जाना पड़ता है। पचेतन-मनोरमपुर के बीच सोयबा नदी पर पुल बनने के बाद यह दूरी घटकर मात्र 2-3 किलोमीटर रह जाएगी।

इसी प्रकार गंगा बिगहा के पास पंचाने नदी पर बनने वाला पुल जिला मुख्यालय तक पहुंचने के समय और दूरी को काफी कम कर देगा। इससे न केवल दैनिक आवागमन आसान होगा, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में मेडिकल सहायता, शिक्षा और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच भी सुगम होगी।

ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तीनों प्रखंडों में छह पुलों के निर्माण को स्वीकृति मिल चुकी है। टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू होगी और इसके बाद निर्माण कार्य आरंभ हो जाएगा। इन पुलों का निर्माण नदियों के किनारे बसे गांवों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ेगा। जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।

साथ ही इन पुलों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में लंबी दूरी और समय की बचत होगी। स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी। मेडिकल और अन्य आवश्यक सेवाओं तक त्वरित पहुंच संभव होगी। बेहतर कनेक्टिविटी से शिक्षा और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।

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