Home नालंदा Commercial Tax Department: जीएसटी डिफॉल्टरों से वसूली की कड़ी तैयारी

Commercial Tax Department: जीएसटी डिफॉल्टरों से वसूली की कड़ी तैयारी

Preparations for strict action against GST defaulters
Preparations for strict action against GST defaulters

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। वाणिज्य कर विभाग (Commercial Tax Department) ने सरकार की राजस्व नीति को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सख्ती बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष के लिए राजस्व लक्ष्य 2.93 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। जिसे विभाग निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए विभिन्न स्तरों पर ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।

वाणिज्य कर विभाग द्वारा विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में जीएसटी बकाया वसूली के उपायों पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान बैंक प्रतिनिधियों को जीएसटी डिफॉल्टरों की सूची सौंपी गई और उन्हें निर्देश दिया गया कि ऐसे करदाताओं के बैंक खातों को होल्ड पर रखा जाए। साथ ही उनके खातों में उपलब्ध शेष राशि की जानकारी भी विभाग को प्रदान करने को कहा गया।

इस बैठक में वाणिज्य कर विभाग ने सभी बैंकों से राजस्व संग्रह लक्ष्य को शत-प्रतिशत प्राप्त करने में सहयोग देने का आग्रह किया। बैंक प्रतिनिधियों को यह भी जानकारी दी गई कि जिन व्यापारियों ने जीएसटी राशि का भुगतान नहीं किया है। उनके खातों से वसूली की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी।

इस बैठक के दौरान बैंक प्रतिनिधियों को खातों की अटैचमेंट प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि ई-मेल के माध्यम से प्राप्त एक्सेल शीट में बैंक विवरण, शाखा का पता, शाखा प्रबंधक का संपर्क नंबर और खाते में शेष राशि की जानकारी भरकर जल्द से जल्द विभाग को उपलब्ध कराई जाए।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो व्यापारी निर्धारित समय-सीमा में बकाया जीएसटी राशि जमा नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे। यदि वे भुगतान करने में विफल रहते हैं तो उनके बैंक खातों को सीज करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। हालांकि वाणिज्य कर विभाग ने जिले में कुल जीएसटी डिफॉल्टरों की संख्या को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की है।

सरकार की इस सख्त नीति से जीएसटी वसूली की प्रक्रिया को तेज़ी मिलेगी और राजस्व लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करने में सहायता होगी। वाणिज्य कर विभाग की यह पहल सरकार की राजस्व नीति को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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