नाबालिगों बच्चियों को 3 दिन तक थाना में रखने पर उबली CWC अध्यक्ष

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। गिरियक थाना क्षेत्र में तीन नाबालिग बच्चियों को तीन दिनों तक थाने में रखने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जिला बाल कल्याण समिति (CWC) की अध्यक्ष पुष्पा पांडे ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई है और इसे किशोर न्याय अधिनियम (जेजे एक्ट) का गंभीर उल्लंघन बताया है।

सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष पुष्पा पांडे के अनुसार बीते 7 मार्च को गिरियक थाना क्षेत्र से तीन नाबालिग लड़कियों का रेस्क्यू किया गया था। लेकिन उन्हें निर्धारित 24 घंटे के भीतर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। जबकि जेजे एक्ट की धारा 32 के अनुसार रेस्क्यू किए गए बच्चों को अनिवार्य रूप से 24 घंटे के भीतर सीडब्ल्यूसी के सामने पेश किया जाना चाहिए। लेकिन इस मामले में तीनों लड़कियों को तीन दिन तक थाने में रखा गया, जो कि कानून का स्पष्ट उल्लंघन है।

इस मामले में और भी अनियमितताएं सामने आई हैं। सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष ने एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि यह कार्यवाही किस धारा और किस सेक्शन के तहत की जा रही है। यह भी स्पष्ट नहीं है। यदि इनमें से एक भी बच्ची नाबालिग है तो कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस अनियमितता के लिए संबंधित अधिकारियों को तलब किया है और उचित जांच की मांग की है।

वहीं, गिरियक थानाध्यक्ष दीपक कुमार ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि शनिवार को लड़कियों के मेडिकल कराने में समय निकल गया। जबकि रविवार को अवकाश के कारण उन्हें कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इसके अलावा परिवार वालों से संपर्क किया गया। लेकिन उन्होंने आने से इन्कार कर दिया। जिसके बाद चाइल्ड वेलफेयर हेल्पलाइन से संपर्क कर लड़कियों का पुनर्वास कराया गया। वहीं इस मामले में गिरफ्तार अभियुक्त को न्यायालय में पेश कर दिया गया है।

गौरतलब है कि 7 मार्च को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, बाल कल्याण समिति, मिशन मुक्ति फाउंडेशन और स्थानीय एनजीओ आईडीआ के संयुक्त प्रयास से ऑर्केस्ट्रा में काम करने वाली इन तीन नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया था।

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