डीएम के आदेश बेअसर, सरकारी जमीन पर कब्जा बरकरार, सिंचाई-रास्ता अवरुद्ध

बेन (नालंदा दर्पण)। बेन अंचल के उमराव विगहा गांव में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि वर्षों पहले जिलाधिकारी द्वारा अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित होने के बावजूद अब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नतीजतन गांव में अवैध कब्जाधारियों का हौसला बढ़ता जा रहा है और सार्वजनिक रास्तों के साथ-साथ किसानों के लिए जीवनरेखा मानी जाने वाली सिंचाई पईन भी अवरुद्ध हो चुकी है।
गांव के रैयत अरुण कुमार सिंह ने वर्ष 2017-18 में ही गैरमजरुआ जमीन पर हो रहे अतिक्रमण की शिकायत जिलाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, अंचलाधिकारी और लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी से की थी। शिकायत में खाता और खेसरा संख्या का स्पष्ट उल्लेख करते हुए बताया गया था कि आम रास्ता और सिंचाई पईन को मिट्टी भरकर पाट दिया गया है। इसके बाद जिलाधिकारी नालंदा के समक्ष दायर अनन्य वाद संख्या 527310118011700637/2A एवं 527310125091700998/2A में अतिक्रमण हटाने का आदेश भी पारित हुआ, लेकिन आदेश फाइलों तक ही सिमट कर रह गया।
सरकारी अमीन की जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर दर्ज है कि खाता संख्या 103 एवं 312 तथा खेसरा संख्या 2557, 2873 और 2857 जो कि गैरमजरुआ भूमि, आम रास्ता और सिंचाई पईन के रूप में दर्ज है। पर गांव के ही कई लोगों द्वारा मिट्टी भरकर कब्जा कर लिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार मिश्री राउत, अजय सिंह, पारस सिंह, अलग राउत, दिलीप सिंह, चंद्रशेखर प्रसाद सिंह, दयानंद सिंह, रंजीत कुमार, सच्चिदानंद और धर्मेंद्र कुमार सहित अन्य लोगों ने इस भूमि पर अवैध निर्माण तक कर लिया है।
परिवादी और अमीन की रिपोर्ट के मुताबिक दर्जनों लोगों ने गैरमजरुआ जमीन पर मकान बना लिए हैं। इससे गांव का सार्वजनिक रास्ता संकरा या पूरी तरह बंद हो गया है। वहीं सिंचाई पईन के अवरुद्ध होने से किसानों को खेतों तक पानी पहुंचाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो आने वाले दिनों में खेती पर सीधा असर पड़ेगा। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण अन्य लोग भी खाली पड़ी सरकारी जमीन पर नजरें गड़ाए बैठे हैं।
गांव में चर्चा है कि अगर अभी सख्ती नहीं हुई तो आने वाले समय में पूरी गैरमजरुआ भूमि पर अवैध कब्जा हो जाएगा। इससे न सिर्फ सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान होगा, बल्कि गांव में आपसी विवाद भी बढ़ सकते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं करना अंचल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अरुण कुमार सिंह समेत कई ग्रामीणों ने एक बार फिर अतिक्रमण हटाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अब देखना यह है कि वर्षों से लंबित इस मामले में प्रशासन कब तक ठोस कदम उठाता है, या फिर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की यह कहानी यूं ही आगे बढ़ती रहेगी।





