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निदेशालय की मनाही के बावजूद नालंदा में फर्जी संस्कृत शिक्षकों को लाखों का भुगतान

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में अराजकीय संस्कृत शिक्षकों की कथित फर्जी नियुक्ति और उनके वेतन भुगतान का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि विभागीय नियुक्ति नियमावली 2015 की अनदेखी कर शिक्षकों की बहाली की गई और बाद में उन्हें विधिवत अनुमोदन प्रदान कर लाखों रुपये का भुगतान भी कर दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता के बजाय पैरवी और कथित आर्थिक लेन-देन को प्राथमिकता दी गई। आरोप यह भी है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) द्वारा इन नियुक्तियों को स्वीकृति प्रदान की गई, जबकि नियमावली के स्पष्ट प्रावधानों का पालन नहीं किया गया था।

इस संबंध में श्री राजीव कुमार मुन्ना ने लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष परिवाद संख्या 42711021912402813 दायर किया था। परिवाद पर पारित आदेश में नियुक्तियों को नियमावली के प्रतिकूल बताया गया। आदेश के बावजूद स्थिति जस की तस बनी रही।

16 लाख से अधिक का भुगतान, कई और मामलों की आशंकाः जानकारी के अनुसार जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) सह निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी आनंद शंकर द्वारा एक शिक्षक, श्री राजेश्वर सिंह को ही 16 लाख रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया गया।

आरोप है कि वर्ष 2026 में ऐसे दस से अधिक शिक्षकों को भी वेतन का भुगतान किया गया। इस प्रकार सरकारी कोष से करोड़ों रुपये की निकासी की आशंका जताई जा रही है।

गौरतलब है कि संबंधित निदेशालय द्वारा पूर्व में ही भुगतान पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया था। साथ ही दोषी पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद न तो भुगतान रोका गया और न ही अब तक किसी अधिकारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई हुई।

पटना से भी उठी आवाजः पटना के कुर्जी बुजुर्ग दीघा निवासी श्रीमती सविता देवी ने भी इस मामले में परिवाद दायर कर जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय एवं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी आनंद शंकर के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने प्रेस के माध्यम से राज्य सरकार से निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों को दंडित करने की अपील की है।

शिक्षा विभाग में हड़कंपः मामले के सार्वजनिक होने के बाद शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है। आमजन में भी आक्रोश व्याप्त है और सवाल उठ रहे हैं कि यदि नियुक्तियां नियमविरुद्ध थीं, तो अनुमोदन और भुगतान किस आधार पर किया गया?

अब सबकी नजर राज्य सरकार और उच्च शिक्षा विभाग पर टिकी है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी या यह मामला भी अन्य विवादों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

समाचार स्रोत: नालंदा दर्पण  डेस्क / तालिब

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