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बिहटा-सरमेरा मुख्य मार्ग पर अनियंत्रित पिकअप ने तीन बच्चों को रौंदा

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण ब्यूरो)। नालंदा जिले के रहुई थाना क्षेत्र में बिहटा-सरमेरा मुख्य मार्ग पर एक भयावह सड़क हादसे ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। स्कूल से घर लौटते तीन मासूम बच्चों को एक अनियंत्रित पिकअप वैन ने अपनी चपेट में ले लिया, जिसमें एक सात साल की बच्ची की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे ने न केवल परिवारों को उजाड़ दिया, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश की लहर दौड़ा दी, जिसके चलते सड़क पर घंटों जाम लगा रहा।

घटना रहुई थाना के सोनसिकरा गांव के पास की है, जहां तीन बच्चे कामिनी कुमारी (7 वर्ष), सुमित कुमार और अधिराज कुमार अलीपुर के एक प्राइवेट स्कूल से छुट्टी के बाद पैदल घर की ओर जा रहे थे। ये बच्चे हंसते-खेलते रास्ते पर थे, लेकिन अचानक पीछे से आ रही एक तेज रफ्तार पिकअप वैन ने उन्हें बुरी तरह रौंद दिया।

टक्कर इतनी जोरदार थी कि कामिनी कुमारी की सांसें मौके पर ही थम गईं। वह सोनसिकरा गांव के भूषण चौहान की बेटी थी। वहीं, सुमित कुमार (अनुज चौहान का बेटा) और अधिराज कुमार (शशिभूषण चौहान का बेटा) गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पिकअप का चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा था, और हादसे के बाद मौके से फरार हो गया।

इस हादसे की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से सैकड़ों लोग जमा हो गए। गुस्साए ग्रामीणों ने बिहटा-सरमेरा मार्ग को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया, जिससे दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। वे प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे थे और आरोपी चालक की तत्काल गिरफ्तारी की गुहार लगा रहे थे।

सूचना मिलते ही बिंद थाना प्रभारी चंदन कुमार सिंह और रहुई थाना प्रभारी अपनी टीमों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित भीड़ को शांत करने की कोशिश की और समझाया कि जांच शुरू हो चुकी है। पुलिस ने कामिनी के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल भेज दिया।

वहीं घायल बच्चों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार सुमित और अधिराज को कई फ्रैक्चर आए हैं और उन्हें विशेष देखभाल की जरूरत है।

यह हादसा सड़क सुरक्षा की कमी को एक बार फिर उजागर करता है। नालंदा जिले में ऐसे मुख्य मार्गों पर ओवरस्पीडिंग और लापरवाह ड्राइविंग की घटनाएं आम हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से स्पीड ब्रेकर या ट्रैफिक कंट्रोल के उपाय न के बराबर हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई की जाती, तो शायद यह त्रासदी टल सकती थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और फरार चालक की तलाश में जुटी है। पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता देने का आश्वासन दिया गया है, लेकिन कामिनी की मौत ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है। उसके माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है, और गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।

समाचार स्रोत: मुकेश भारतीय/मीडिया रिपोर्ट्स

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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