Home फीचर्ड आंगनबाड़ी केंद्र के अंदर बकरी और बाहर गोइठा, ग्रामीणों का हंगामा

आंगनबाड़ी केंद्र के अंदर बकरी और बाहर गोइठा, ग्रामीणों का हंगामा

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। रहुई प्रखंड के कुमरडीह गांव में लंबे समय से बंद पड़े आंगनबाड़ी केंद्र ने गुरुवार को ग्रामीणों के गुस्से को हवा दे दी। वर्षों से बंद इस केंद्र के कारण ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। नाराज ग्रामीणों ने प्राथमिक विद्यालय कुमरडीह पहुंचकर जमकर हंगामा किया और शिक्षकों के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि आंगनबाड़ी केंद्र का भवन तो मौजूद है, लेकिन यह बच्चों की शिक्षा और देखभाल के लिए नहीं, बल्कि बकरियां बांधने और गोइठा रखने के काम आ रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र के बंद होने से 3 से 4 वर्ष की आयु के छोटे बच्चों को मजबूरी में प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने के लिए भेजना पड़ रहा है। दो महीने पहले तक ये बच्चे विद्यालय में पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन अब प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने उन बच्चों को स्कूल आने से मना कर दिया है।

ग्रामीणों का तर्क है कि जिन बच्चों का नामांकन स्कूल में नहीं हुआ है, वे यहां पढ़ाई नहीं कर सकते।  आखिर उनके बच्चों की शुरुआती शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का क्या होगा।

ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र का भवन पूरी तरह उपेक्षित है। केंद्र के अंदर खाद और गोइठा रखा जाता है, जबकि बाहर बकरियां बांधी जाती हैं। केंद्र में बच्चों के लिए कोई सुविधा नहीं है। टीकाकरण और पोषण जैसे बुनियादी कार्यों के लिए हमें पड़ोस के गांवों में जाना पड़ता है, जो हमारे लिए बहुत मुश्किल है।

आंगनबाड़ी केंद्र की इस स्थिति ने न केवल बच्चों की शिक्षा को प्रभावित किया है, बल्कि टीकाकरण और पोषण जैसी आवश्यक सेवाओं पर भी असर डाला है। माता-पिता को अपने बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।

ग्रामीणों के उग्र प्रदर्शन को देखते हुए प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि जब तक आंगनबाड़ी केंद्र दोबारा शुरू नहीं हो जाता, तब तक छोटे बच्चों को पहले की तरह स्कूल में पढ़ने की अनुमति दी जाएगी।

ग्रामीणों की मांग है कि आंगनबाड़ी केंद्र को जल्द से जल्द चालू किया जाए, ताकि बच्चों को शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि

मामले की गंभीरता को देखते हुए बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) ने त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया है। सीडीपीओ ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र की स्थिति की जांच शुरू कर दी गई है। हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। जल्द ही केंद्र के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी और इसे पुनः शुरू करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।

कुमरडीह गांव के ग्रामीण अब प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा कर रहे हैं, लेकिन उनकी चिंता यह है कि आंगनबाड़ी केंद्र कब तक चालू होगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या केवल कुमरडीह तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के कई गांवों में भी आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति खराब है।

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