मैट्रिक पास बेरोजगारों के लिए सुनहरा अवसर: बनें इनपुट डीलर, 18 से 60 वर्ष है उम्र सीमा

यह योजना न केवल बेरोजगार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित रोजगार को भी प्रोत्साहन देगी। इस पहल से न सिर्फ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि कृषि क्षेत्र में तकनीकी और उत्पादकता में सुधार भी होगा

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। अब मैट्रिक (दसवीं) पास युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर उपलब्ध है। कृषि क्षेत्र में रुचि रखने वाले लाभुक अब उर्वरक, बीज, कीटनाशी और फफूंदनाशी जैसे उत्पादों की बिक्री के लिए इनपुट डीलर का लाइसेंस प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए 48 दिनों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

अभ्यर्थियों को कृषि विज्ञान केंद्र में 48 दिनों का प्रशिक्षण लेना होगा। इस प्रशिक्षण का शुल्क 20,000 रुपये निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण के बाद अभ्यर्थियों को डिप्लोमा का सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा।

इस प्रशिक्षण की अवधि 48 सप्ताह (हर सप्ताह एक दिन की कक्षा), शुल्क 20,000 रुपये, आयु सीमा 18 से 60 वर्ष, योग्यता न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता दसवीं पास निर्धारित है।

इनपुट डीलर के लिए पहले से लाइसेंस रिन्युअल की सुविधा भी उपलब्ध है। उन्हें केवल 10,000 रुपये का शुल्क देकर अपने लाइसेंस को नवीनीकृत कराया जा सकता है।

कृषि विज्ञान केंद्र के मुताबिक आमतौर पर इनपुट डीलर बनने के लिए रसायन विज्ञान में डिग्री धारकों को प्राथमिकता दी जाती है। लेकिन देसी योजना के तहत दसवीं पास अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण के बाद डिप्लोमा सर्टिफिकेट दिया जाएगा।  जिससे वे इनपुट डीलर बनने के योग्य बनेंगे।

वहीं जो अभ्यर्थी केवल उर्वरक के लाइसेंस के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उनके लिए उद्यान महाविद्यालय नूरसराय के माध्यम से अलग कोर्स आयोजित किया जाएगा। इस कोर्स का शुल्क 12,000 रुपये है।

यह पूरी प्रक्रिया “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर है। यानी जो अभ्यर्थी पहले आवेदन करेंगे, उन्हें पहले प्राथमिकता दी जाएगी।

वेशक दसवीं पास बेरोजगारों के लिए इनपुट डीलर बनने का यह अवसर एक क्रांतिकारी कदम है। इससे न केवल उन्हें रोजगार का नया साधन मिलेगा, बल्कि कृषि क्षेत्र में उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी। अगर आप भी इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं तो जल्दी आवेदन करें और अपनी नई राह बनाएं।

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