दिल्ली से चली बच्ची वारसलीगंज से रास्ता भटकी, कतरीसराय पुलिस ने परिजनों से मिलाया

कतरीसराय (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के कतरीसराय थाना क्षेत्र के मायापुर मोड़ पर उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक नाबालिग बच्ची को लंबे समय तक इधर-उधर भटकते देखा गया। स्थानीय लोगों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी।

सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने बिना देरी किए पेट्रोलिंग टीम को मौके पर भेजा और बच्ची को सुरक्षित थाना लाया गया। शुरुआती पूछताछ में बच्ची स्पष्ट रूप से अपना पता नहीं बता पा रही थी और उसकी भाषा से यह प्रतीत हो रहा था कि वह दिल्ली क्षेत्र से जुड़ी हुई है, जिससे पुलिस की चिंता और बढ़ गई।

थाने में गहन पूछताछ के दौरान बच्ची ने बताया कि उसके माता-पिता दिल्ली में मजदूरी करते हैं और वह अपनी दादी से मिलने के लिए गया जिले के मायापुर गांव जा रही थी। सफर के दौरान वह किऊल जंक्शन से गया जाने वाली ट्रेन में बैठी, लेकिन भ्रमवश वारसलीगंज स्टेशन पर उतर गई।

इसके बाद अनजान रास्तों पर भटकते-भटकते वह कतरीसराय के मायापुर मोड़ तक पहुंच गई। यह घटना दर्शाती है कि लंबी दूरी की यात्रा में छोटी सी गलती भी बच्चों के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकती है, खासकर तब जब वे अकेले सफर कर रहे हों और उन्हें मार्ग की पूरी जानकारी न हो।

सबसे बड़ी चुनौती तब सामने आई जब बच्ची अपने परिजनों का मोबाइल नंबर भी नहीं बता पाई। इसके बावजूद पुलिस ने सूझबूझ और अनुभव का परिचय देते हुए बच्ची द्वारा बताए गए नाम और गांव के आधार पर खोजबीन शुरू की।

थानाध्यक्ष ने फतेहपुर थाना से संपर्क साधा और पिता अरविंद कुमार के नाम तथा गांव की जानकारी के आधार पर परिजनों तक पहुंच स्थापित की गई। कुछ ही समय में बच्ची की दादी और अन्य परिजन कतरीसराय थाना पहुंच गए, जहां पहचान सुनिश्चित करने के बाद बच्ची को सुरक्षित उनके हवाले कर दिया गया।

यह घटना न सिर्फ पुलिस की तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश छोड़ती है। आज के दौर में जब बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए महानगरों की ओर पलायन कर रहे हैं, बच्चों की सुरक्षा और उनकी यात्रा व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि बच्चों को अकेले यात्रा पर भेजने से पहले उन्हें पूरी जानकारी देना, पहचान संबंधी दस्तावेज और संपर्क नंबर उपलब्ध कराना कितना जरूरी है। साथ ही, स्थानीय लोगों की सजगता और पुलिस-जन सहयोग ही ऐसी घटनाओं को सुरक्षित अंजाम तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

 

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