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राजनीति और लूट का अखाड़ा बनता जा रहा है मगध होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय

Magadh Homeopathic Medical College and Hospital is becoming a political arena

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। कभी होम्योपैथ की पढ़ाई के लिए जिले हीं नहीं, बिहार में मगध होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल विशिष्ट पहचान रखता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह राजनीति का अखाड़ा बनता जा रहा है। लगभग आठ सत्र से इस मेडिकल कॉलेज में छात्रों का नामांकन बंद है और अब तो तत्कालीन प्राचार्य के मृत्यु के बाद यह कॉलेज पूरी तरह राजनीति का अखाड़ा बन गया है।

हालात यह है कि रोज नया-नया मामला सामने आने लगा है। कुछ दिन पहले कॉलेज के शासी निकाय ने नये प्रभारी प्रचार्य के नियुक्ति की घोषणा की थी और प्रभारी प्राचार्य डॉ. कुमार सौरभ पर वित्तीय अनियमिता सहित कई आरोप लगाये थे और कहा था कि इस मामले में प्राचार्य पर मुकदमा किया गया है।

लेकिन अब कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य ने प्रेस वार्ता कर अपने उपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए सचिव अनिल कुमार पर हीं कई आरोप मढ़े और इस संबंध में कई दस्तावेज भी मीडिया के सामने रखा और कहा कि जो राशि की निकासी को गबन बताया जा रहा है, वह राशि कॉलेज कर्मियों के वेतन देने के लिए निकाला गया था, जिसका पूरा लेखा-जोखा है।

प्रभारी प्राचार्य ने यह भी कहा कि अनिल कुमार सचिव पद से 10 जून को हीं त्याग पत्र दे दिये थे, जिसे कमेटी ने स्वीकार भी कर लिया, जबकि अध्यक्ष कृष्णबल्लभ प्रसाद लंबे अरसे से कॉलेज नहीं आ रहे थे। सूचना के बाद भी बैठकों में शामिल नहीं हो रहे थे। इसी को लेकर 27 अगस्त को बैठक कर अनुराधा देवी को सचिव बनाया गया था, जिसमें कमेटी के 11 में से 8 सदस्यों ने हिस्सा लिया था।

यह भी आरोप लगाया गया कि कॉलेज के लेटर हेड और मुहर का दुरूपयोग कर नये प्राचार्य की घोषणा की गयी। साथ हीं यह भी कहा कि उनला. गों के हठधर्मिता के कारण कर्मियों को छः माह से वेतन नहीं मिला है और इसी के लिए पैसा निकाला गया था। कॉलेज के पूर्व सचिव पर कॉलेज में हंगामा करने के मामले में मुकदमा दर्ज कराई गयी थी।

उन्होंने कॉलेज में अराजक स्थिति बनाये रखने के लिए अध्यक्ष, पूर्व सचिव तथा संयुक्त सचिव कुमार पुरुषोत्तम को जिम्मेवार ठहराया। उन्होंने यह भी कहा कि आपसी खींचतान की वजह से शैक्षणिक सत्र 2016-17 से हीं कॉलेज में नामांकन नहीं हो रहा है, जिससे छात्रों का भविष्य अधर में है। कॉलेज में 40 कर्मी है, सिर्फ ओपीडी सेवा चल रही है। मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं होने से कॉलेज की आर्थिक स्थिति भी खराब हुई है।

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