विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता आएगी और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिल सकती है…
बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के प्राचीन मघड़ा शीतला मंदिर को अब आधिकारिक रूप से सार्वजनिक धार्मिक संपत्ति घोषित कर दिया गया है। हाल ही में मंदिर परिसर में हुई दर्दनाक भगदड़ की घटना के बाद प्रशासन और धार्मिक न्यास पर्षद ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला प्रशासन के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद मघड़ा शीतला मंदिर को सार्वजनिक संपत्ति के रूप में अधिसूचित किया गया है। इसके साथ ही बिहारशरीफ अनुमंडल के एसडीओ को मंदिर का मुख्य न्यासी (ट्रस्टी) नियुक्त किया गया है, ताकि मंदिर की व्यवस्था पारदर्शी और सुव्यवस्थित तरीके से संचालित की जा सके।
भगदड़ कांड के बाद प्रशासन हुआ सक्रियः दरअसल दो दिन पहले शीतला मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के दौरान अचानक भगदड़ मच गई थी, जिसमें आठ महिलाओं की मौत हो गई थी। इस दुखद घटना के बाद मंदिर की व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और प्रवेश प्रबंधन को लेकर कई गंभीर सवाल उठे थे।
घटना के बाद धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन ने स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया था। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद पर्याप्त प्रबंधन और नियंत्रण व्यवस्था नहीं थी।
पैसे लेकर पीछे के रास्ते से प्रवेश कराने का आरोपः भगदड़ की इस घटना को लेकर दीपनगर थाना में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है। दीपनगर निवासी अर्जुन सिंह ने अपनी पत्नी कांति देवी की मौत के बाद मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है।
उन्होंने पुलिस को बताया कि मंदिर में कुछ पुजारी और व्यवस्थापक कथित तौर पर पैसे लेकर श्रद्धालुओं को पीछे के दरवाजे से प्रवेश करा रहे थे। इससे मुख्य द्वार पर अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया। तेज गर्मी और धक्का-मुक्की के कारण कई श्रद्धालु गिर पड़े और भगदड़ की स्थिति बन गई।
16 नामजद और कई अज्ञात पर केसः अर्जुन सिंह की शिकायत पर पुलिस ने 16 लोगों को नामजद करते हुए मामला दर्ज किया है। जिन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है, उनमें मुख्य पंडा मुन्ना लाल पांडेय, रविरंजन पांडेय, विवेका पांडेय, सोनू कुमार, रंजीत पांडेय, प्रभात पांडेय, दिलीप पांडेय, अशोक निराला, प्रीतम पांडेय, मिथिलेश पांडेय, धीरज, राजेश, सत्यम मिश्रा, निरंजन पांडेय, रोहित राउत और अवधेश पांडेय शामिल हैं। इसके अलावा 15–20 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
मंदिर प्रबंधन में आएंगे बड़े बदलावः मंदिर को सार्वजनिक संपत्ति घोषित करने के बाद अब इसकी व्यवस्था सीधे प्रशासनिक निगरानी में होगी। एसडीओ को मुख्य न्यासी बनाए जाने का मतलब है कि मंदिर की आय-व्यय, श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और पूजा व्यवस्था पर प्रशासन की सीधी नजर रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता आएगी और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिल सकती है।
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा पर होगी नई व्यवस्थाः सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में मंदिर परिसर में प्रवेश और निकास के अलग मार्ग, बैरिकेडिंग, सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षा बलों की तैनाती जैसी व्यवस्थाएं भी की जा सकती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शीतला माता मंदिर में खास पर्वों और मंगलवार-शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासनिक निगरानी से श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा दोनों में सुधार की उम्मीद है।
