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सात निश्चय-3 के तहत नगरनौसा, थरथरी समेत इन 8 प्रखंडों में खुलेंगे डिग्री कॉलेज

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में उच्च शिक्षा के ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में प्रशासन ने अब निर्णायक कदम बढ़ा दिए हैं। ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य योजना की प्रगति की समीक्षा के लिए शुक्रवार को समाहरणालय में एक अहम बैठक आयोजित की गई।

बैठक की अध्यक्षता जिला पदाधिकारी (डीएम) कुंदन कुमार ने की। इस दौरान शिक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और संभावित समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई।

डिग्री कॉलेज विहीन प्रखंडों पर विशेष फोकस

बैठक का मुख्य एजेंडा उन प्रखंडों की स्थिति की समीक्षा करना था, जहां अब तक एक भी डिग्री महाविद्यालय संचालित नहीं हो रहा है।

प्रशासन का मानना है कि उच्च शिक्षा की पहुंच जब तक प्रखंड स्तर तक नहीं पहुंचेगी, तब तक ग्रामीण प्रतिभाओं को बराबरी का अवसर नहीं मिल सकेगा।

इसी सोच के तहत उन इलाकों की पहचान कर प्राथमिकता तय की जा रही है, जहां कॉलेज की अनुपस्थिति के कारण छात्र-छात्राओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने रखी जमीनी हकीकत

जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने बैठक में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि रहुई, नूरसराय, बिंद, नगरनौसा, कतरीसराय, करायपरशुराय, थरथरी, परवलपुर और सरमेरा प्रखंडों में डिग्री स्तर की पढ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं है।

इन क्षेत्रों के विद्यार्थी इंटरमीडिएट के बाद उच्च शिक्षा के लिए बिहारशरीफ, पटना या अन्य जिलों की ओर रुख करने को मजबूर होते हैं।

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए यह सफर न केवल महंगा बल्कि कई बार पढ़ाई छोड़ने की वजह भी बन जाता है।

लंबी दूरी बन रही शिक्षा में बाधा

प्रखंडों से दूर स्थित कॉलेजों तक पहुंचने के लिए छात्रों को रोजाना कई किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है। खासकर छात्राओं के लिए यह और भी चुनौतीपूर्ण साबित होता है।

परिवहन सुविधा सीमित होने, सुरक्षा को लेकर परिवारों की चिंता और समय की बर्बादी के कारण बड़ी संख्या में मेधावी छात्र उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। बैठक में इस सामाजिक वास्तविकता को गंभीरता से रेखांकित किया गया।

डीएम ने जताई चिंता, दिए सख्त निर्देश

जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षा किसी भी जिले के समग्र विकास की आधारशिला होती है। यदि युवाओं को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध नहीं होगी तो विकास की रफ्तार स्वतः प्रभावित होगी।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि जिन प्रखंडों में कॉलेज नहीं हैं, वहां प्रस्तावित डिग्री महाविद्यालयों का संचालन जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाए।

स्थानीय कॉलेज से बदलेगी तस्वीर

डीएम ने कहा कि जब छात्रों को अपने ही क्षेत्र में डिग्री कॉलेज मिलेगा, तो नामांकन दर बढ़ेगी, पढ़ाई में निरंतरता आएगी और ड्रॉपआउट की समस्या स्वतः कम होगी। स्थानीय कॉलेज खुलने से ग्रामीण इलाकों में शैक्षणिक माहौल भी मजबूत होगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस योजना को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस प्रगति दिखाई देनी चाहिए।

स्थायी भवन निर्माण पर भी जोर

बैठक में सिर्फ कॉलेज खोलने की घोषणा तक सीमित न रहकर उसके स्थायी संचालन की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

डीएम ने निर्देश दिया कि सभी प्रस्तावित महाविद्यालयों के लिए विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप पर्याप्त और उपयुक्त भूमि की पहचान की जाए।

भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया पारदर्शी और शीघ्र पूरी करने को कहा गया, ताकि भविष्य में भवन निर्माण में कोई बाधा न आए।

अस्थायी व्यवस्था से शुरू, स्थायी ढांचे की ओर बढ़त

अधिकारियों ने बताया कि जहां तत्काल भवन निर्माण संभव नहीं है, वहां अस्थायी व्यवस्था के तहत पठन-पाठन शुरू करने की योजना बनाई जा सकती है। इसके लिए सरकारी भवनों या उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किया जा सकता है।

डीएम ने कहा कि लक्ष्य यह होना चाहिए कि छात्रों की पढ़ाई जल्द शुरू हो, जबकि समानांतर रूप से स्थायी परिसर के निर्माण की प्रक्रिया जारी रहे।

समग्र शिक्षा अभियान की भूमिका महत्वपूर्ण

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, समग्र शिक्षा अभियान को भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने का निर्देश दिया गया। उन्हें योजना निर्माण, संसाधन समन्वय और विभागीय स्तर पर प्रस्ताव भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

डीएम ने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल से ही यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य समय पर पूरा हो सकेगा।

सरकार की प्राथमिकता: हर प्रखंड में उच्च शिक्षा

बैठक में दोहराया गया कि राज्य सरकार की मंशा प्रत्येक प्रखंड में उच्च शिक्षा की सुलभता सुनिश्चित करना है। ‘सात निश्चय–3’ के अंतर्गत चल रही यह पहल सिर्फ शैक्षणिक परियोजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शैक्षणिक असमानता को कम करना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है।

युवाओं के सपनों को मिल सकेगा पंख

विशेषज्ञों का मानना है कि डिग्री कॉलेज खुलने से न सिर्फ छात्रों को लाभ होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। शिक्षकों, कर्मचारियों और सहायक सेवाओं की आवश्यकता से आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।

साथ ही उच्च शिक्षा प्राप्त युवा भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं, प्रोफेशनल कोर्स और उद्यमिता की ओर भी अग्रसर हो सकेंगे।

सामाजिक बदलाव की दिशा में अहम कदम

ग्रामीण समाज में शिक्षा के विस्तार से बाल विवाह, अशिक्षा और बेरोजगारी जैसी समस्याओं पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। खासकर बेटियों की पढ़ाई को बढ़ावा मिलने से सामाजिक सोच में बदलाव आता है।

बैठक में यह बात भी सामने आई कि स्थानीय कॉलेज खुलने से अभिभावकों का भरोसा बढ़ेगा और वे अपनी बेटियों को आगे पढ़ाने के लिए अधिक प्रेरित होंगे।

अधिकारियों की मौजूदगी में बनी कार्ययोजना

बैठक में अपर समाहर्ता, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा अभियान) समेत कई संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। सभी अधिकारियों को अपने-अपने स्तर पर समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। आने वाले हफ्तों में प्रगति की पुनः समीक्षा किए जाने की बात भी कही गई, ताकि योजना की रफ्तार बनी रहे।

ग्रामीण शिक्षा के नए युग की शुरुआत

इस बैठक को नालंदा जिले में उच्च शिक्षा के नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यदि तय समयसीमा के भीतर कॉलेजों का संचालन शुरू हो जाता है तो हजारों छात्रों का भविष्य संवर सकता है।

प्रशासन की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि अब शिक्षा सिर्फ वादों का विषय नहीं, बल्कि प्राथमिकता के केंद्र में है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जमीनी स्तर पर यह पहल किस तरह आकार लेती है।

( नालंदा दर्पण के लिए बिहारशरीफ से रंजीत कुमार की रिपोर्ट )

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