Home पर्यावरण एशियाई जल पक्षियों की मधुर चहचहाहट से गुंजायमान हुआ नालंदा

एशियाई जल पक्षियों की मधुर चहचहाहट से गुंजायमान हुआ नालंदा

Nalanda resonates with the chirping of Asian water birds
Nalanda resonates with the chirping of Asian water birds

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के जलाशय और आर्द्र भूमि क्षेत्र एक बार फिर एशियाई जल पक्षियों की मधुर चहचहाहट से गुंजायमान हो उठे हैं। पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा संपन्न एशियाई जल पक्षी गणना की ताजा रिपोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक उत्साहजनक तस्वीर प्रस्तुत की है। यह न केवल जिले की जैव विविधता की समृद्धि को दर्शाता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों की सफलता का भी प्रमाण है।

रिपोर्ट के अनुसार मात्र तीन वर्षों में नालंदा के जलाशयों में पक्षियों की संख्या में ढाई गुना वृद्धि दर्ज की गई है। जहां 2022 में केवल 1062 पक्षी और 28 प्रजातियां दर्ज की गई थीं। वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 2751 पक्षी और 67 प्रजातियों तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष (2023) के 2571 पक्षी और 42 प्रजातियों की तुलना में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

वन प्रमंडल पदाधिकारी राजकुमार एम. के अनुसार ये आंकड़े नालंदा के पारिस्थितिकी तंत्र की बेहतरी और जैव विविधता की समृद्धि को प्रदर्शित करते हैं। यह हमारे संरक्षण प्रयासों और स्थानीय समुदाय की सहभागिता का परिणाम है।

पक्षियों की संख्या में इस उल्लेखनीय वृद्धि के पीछे कई कारक हैं। पिछले वर्ष की मानसून की प्रचुर वर्षा ने जलाशयों के जल स्तर को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे पक्षियों के लिए उपयुक्त आवास और भोजन की उपलब्धता बढ़ी।

वन विभाग द्वारा अवैध शिकार पर सख्ती से लगाम लगाई गई है। नियमित गश्त और निगरानी ने पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित की। स्थानीय समुदायों के बीच पर्यावरण और पक्षी संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे अभियानों ने सकारात्मक प्रभाव डाला।

यह गणना जिले के छह प्रमुख जलाशयों और नदी क्षेत्रों में की गई। जिनमें गंगाजी राजगृह जलाशय, पुष्कर्णी झील, गिद्धि झील (बेगमपुर), आयुध निर्माणी का जलाशय, पावापुरी, पंचानन नदी क्षेत्र शामिल हैं।

गणना के अनुसार कुल 2751 पक्षियों में 2337 जल पक्षी, 372 भूमि पक्षी और 42 आर्द्र भूमि पर निर्भर पक्षी शामिल हैं। यह विविधता इस क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती और विभिन्न प्रजातियों के लिए उपयुक्त आवास की उपलब्धता को दर्शाती है।

गणना में कई दुर्लभ और आकर्षक पक्षी प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई। जिनमें नीलसर जलमुर्गी, कांस्य-पंख जकाना, ओपनबिल सारस, तालाब बगुला, छोटी सीटी बतख, साधारण जलमुर्गी, मध्य बगुला, छोटा बगुला, साधारण सैंडपाइपर, तीतर-पूंछ जकाना, धूसर बगुला, यूरेशियन कॉलर्ड फाख्ता, गैडवेल, सामान्य तील, सफेद-आंखों वाली पोचार्ड, उत्तरी पिनटेल, छोटा रिंग प्लोवर, नीला गला शामिल हैं।

इन प्रजातियों की मौजूदगी ने पक्षी प्रेमियों और पर्यावरणविदों में उत्साह का संचार किया है। उनकी बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि जलाशयों की जल गुणवत्ता में सुधार हुआ है और भोजन की उपलब्धता बढ़ी है। यह क्षेत्र अब विभिन्न प्रजातियों के लिए एक सुरक्षित और उपयुक्त आवास के रूप में उभर रहा है।

वन विभाग ने इस सफलता को और आगे ले जाने के लिए कई योजनाएं बनाई हैं। इनमें जलाशयों के आसपास वृक्षारोपण को बढ़ावा देना, पक्षी संरक्षण के लिए और अधिक जागरूकता अभियान चलाना, अवैध शिकार और पर्यावरणीय क्षति को रोकने के लिए सख्त निगरानी, स्थानीय समुदायों को संरक्षण कार्यों में और अधिक शामिल करना शामिल हैं।

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